‘बीजेपी से नाराज लोग भी कांग्रेस को वोट नहीं देंगे’, केजरीवाल ने बताया AAP का गेम प्लान
अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस और AAP के बीच वोट बंटने की चर्चा को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि गैर-BJP वोटरों को केवल कांग्रेस का वोटर मानना गलत है। केजरीवाल के मुताबिक बीजेपी से नाराज मतदाता भी AAP को विकल्प के तौर पर देखते हैं।
‘बीजेपी से नाराज लोग भी कांग्रेस को वोट नहीं देंगे’, केजरीवाल ने बताया AAP का गेम प्लान
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पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला तेज हो रहा है। दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर बीजेपी के खिलाफ वोट करने वाले मतदाता AAP और कांग्रेस में बंट गए तो इसका फायदा बीजेपी को हो सकता है। अरविंद केजरीवाल ने इस तर्क को गलत बताया है।


केजरीवाल ने क्या कहा?

केजरीवाल का कहना है कि यह मानना सही नहीं है कि AAP को सिर्फ गैर-बीजेपी वोट ही मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बीजेपी समर्थक भी हैं जो पार्टी से नाराज होने के बाद किसी दूसरे विकल्प की तलाश करते हैं और कांग्रेस की बजाय AAP को चुन सकते हैं। यानी केजरीवाल का दावा है कि AAP का वोट बैंक सिर्फ विपक्षी वोट तक सीमित नहीं है।


पंजाब में कांग्रेस और AAP आमने-सामने

पंजाब में AAP सरकार चला रही है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दलों में शामिल है। दोनों पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर कई मौकों पर बीजेपी विरोधी राजनीति में साथ दिखाई दी हैं, लेकिन पंजाब में उनका सीधा मुकाबला है। लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। अब विधानसभा चुनाव में भी दोनों के बीच गठबंधन की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई दे रही।


वोट बंटने का कितना असर?

राजनीतिक तौर पर वोटों का बंटवारा हमेशा चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है। अगर किसी सीट पर मुकाबला करीबी हो और विपक्षी वोट दो हिस्सों में बंट जाएं तो तीसरे दल को फायदा हो सकता है। इसी वजह से कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन को लेकर चर्चा होती रहती है। लेकिन केजरीवाल का कहना है कि AAP को अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों का समर्थन मिलता है।


कांग्रेस के लिए क्या चुनौती?

कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह खुद को पंजाब में बीजेपी और AAP दोनों के खिलाफ मजबूत विकल्प के रूप में पेश करे। अगर कांग्रेस गैर-BJP वोटरों का बड़ा हिस्सा अपने पक्ष में लाने में सफल होती है तो AAP को नुकसान हो सकता है। दूसरी तरफ अगर केजरीवाल का दावा सही साबित होता है तो AAP बीजेपी से नाराज मतदाताओं का भी समर्थन हासिल कर सकती है।


2027 में साफ होगा असली समीकरण

फिलहाल चुनाव में समय है और राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने में जुटे हैं। केजरीवाल का ताजा बयान साफ संकेत देता है कि AAP कांग्रेस के साथ गठबंधन की बजाय अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर भरोसा कर रही है। अब असली परीक्षा 2027 में होगी, जब मतदाता तय करेंगे कि बीजेपी से नाराजगी का फायदा कांग्रेस को मिलता है या AAP को।

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