ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों के लिए आवास से जुड़ी बड़ी योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को उनकी मौजूदा जगह के आसपास ही बेहतर और पक्का आवास उपलब्ध कराना है। इस योजना को इन-सिटू स्लम पुनर्वास कहा जा रहा है। यानी लोगों को शहर से दूर किसी नई जगह भेजने के बजाय उसी क्षेत्र में बेहतर आवास देने की कोशिश की जाएगी।
निजी डेवलपरों की भागीदारी
योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए निजी डेवलपरों की भागीदारी पर भी चर्चा हो रही है। 25 सितंबर को निवेशकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें निजी कंपनियों से पुनर्वास परियोजनाओं के मॉडल को लेकर सुझाव लिए गए। इस बैठक में निवेश, परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता, जोखिम, मंजूरियों और जमीन पर काम शुरू करने जैसी चुनौतियों पर चर्चा हुई। डेवलपरों से मिले सुझावों के आधार पर योजना के मॉडल में बदलाव किए जाने की बात कही गई है।
सिर्फ मकान नहीं, पूरा इलाका विकसित करने की योजना
इस योजना की खास बात यह है कि पुनर्वास को सिर्फ मकान बनाने तक सीमित नहीं रखने की बात कही गई है। योजना में सड़क, नागरिक सुविधाएं और दूसरे जरूरी शहरी ढांचे को भी शामिल किया जाएगा। मास्टर प्लान दिल्ली-2047 में करीब 17 लाख JJ क्लस्टर निवासियों के इन-सिटू पुनर्वास की कल्पना की गई है। इसका उद्देश्य पात्र परिवारों को बेहतर आवास देने के साथ उन इलाकों का भी योजनाबद्ध विकास करना है जहां ये बस्तियां मौजूद हैं।
आगे क्या होगा?
अभी योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। निजी डेवलपरों से बातचीत के बाद मॉडल को अंतिम रूप दिया जाएगा और उसके बाद खरीद तथा क्रियान्वयन से जुड़े अगले चरण शुरू होंगे। अगर योजना तय तरीके से आगे बढ़ती है तो दिल्ली की बड़ी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों की आवास समस्या को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर योजना के लागू होने और पात्र परिवारों को घर मिलने के बाद ही साफ होगा।
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