ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में सरकारी विभागों और नगर निकायों से जुड़े भ्रष्टाचार के कई मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं। अलग-अलग कार्रवाई में अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा गया और उनके ठिकानों से बड़ी रकम बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड यानी डूसिब, नगर निगम और आबकारी विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं। पिछले सात दिनों में तीन बड़े मामलों के सामने आने की जानकारी दी गई है।
डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी बरामद
एक मामले में सीबीआई ने पश्चिमी दिल्ली में एक आबकारी निरीक्षक को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा। कार्रवाई के दौरान उसके ठिकाने से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद नंद नगरी इलाके में खेल मैदान की जमीन आवंटन से जुड़े मामले में डूसिब के एक अधिशासी अभियंता को एक लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते पकड़ा गया। उसके घर से 41 लाख रुपये की नकदी मिलने की बात भी सामने आई है।
एमसीडी से जुड़े मामले भी सामने आए
16 सितंबर को नगर निगम से जुड़े एक मामले में एक वरिष्ठ सचिवालय सहायक समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। उन पर 15 लाख रुपये की कथित रिश्वत से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई और करीब 25.25 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई। इन मामलों के अलावा साल के अलग-अलग महीनों में भी दिल्ली के सरकारी विभागों से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले सामने आते रहे हैं।
पहले भी हुई हैं कई गिरफ्तारियां
जनवरी में कश्मीरी गेट के सब-रजिस्ट्रार को 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई थी। मार्च में एमसीडी के दो अधिकारियों को चार लाख रुपये की कथित रिश्वत से जुड़े मामले में पकड़ा गया। जून में दवाओं की खरीद से जुड़े भ्रष्टाचार की जांच में कुछ पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई। जुलाई में तिहाड़ जेल से जुड़े रिश्वत मामले में भी कई लोगों पर कार्रवाई हुई। उसी महीने पंजाबी बाग के सब-रजिस्ट्रार और पीडब्ल्यूडी के एक सहायक अभियंता से जुड़े मामले भी सामने आए।
कार्रवाई के बाद सामने आ रहे मामले
भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद नकदी, संपत्ति और रिश्वत के लेन-देन से जुड़ी जानकारियां सामने आती हैं। हालांकि हर मामले में अंतिम दोष तय होना अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होता है। फिलहाल इन मामलों ने दिल्ली के सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर फिर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि सिर्फ गिरफ्तारी और बरामदगी से समस्या कितनी कम होगी और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए जांच और कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत रहती है जिससे रिश्वत मांगने या देने की गुंजाइश कम हो सके
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