ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने करीब 3 करोड़ रुपये के प्रॉपर्टी लोन फ्रॉड का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने कथित तौर पर पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड मनीष कुमार को लक्ष्मी नगर से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने एक खाली पड़ी करोड़ों रुपये की संपत्ति को निशाना बनाया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे अपनी संपत्ति दिखाकर निजी फाइनेंस कंपनी से भारी-भरकम लोन हासिल कर लिया।
खाली संपत्ति को बनाया निशाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने आनंद विहार के डी-ब्लॉक स्थित एक संपत्ति पर नजर रखी। इस संपत्ति की असली मालकिन की जगह दूसरी महिला को खड़ा कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर आरोपी ने खुद को संपत्ति का वैध खरीदार बताया और करोड़ों रुपये के हाउसिंग लोन के लिए आवेदन किया। जांच में पता चला कि केवल 25 दिनों के अंदर एक ही संपत्ति की दो बार फर्जी बिक्री दिखाई गई।
फर्जी पहचान से कराई गई रजिस्ट्री
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले में पहचान बदलकर दस्तावेज तैयार किए गए। असली मालिक की जगह दूसरी महिला को संपत्ति की मालिक बताया गया और उसी के हस्ताक्षर के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी वास्तविक पत्नी की जगह किसी दूसरी महिला को पत्नी बताकर लोन दस्तावेजों में सह-आवेदक बना दिया। इससे बैंक और फाइनेंस कंपनी को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि सभी दस्तावेज सही हैं।
फर्जी कंपनियों के जरिए रकम ठिकाने लगाने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर कई फर्जी कंपनियां बनाई थीं। इनमें ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी, ग्लोबल फाइनेंस लिमिटेड और बांके बिहारी एंटरप्राइजेज जैसी संस्थाएं शामिल थीं। पुलिस का कहना है कि इन कंपनियों के बैंक खातों के जरिए लोन की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने की कोशिश की गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि लोन की रकम आखिर किन खातों में पहुंची और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
ठिकाने बदलकर पुलिस से बच रहा था आरोपी
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। वह पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए अलग-अलग जगहों पर रह रहा था। ईओडब्ल्यू की टीम ने तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की मदद से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद उसे लक्ष्मी नगर स्थित किराए के कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया गया।
छापेमारी में मिले कई अहम सबूत
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से कई महत्वपूर्ण चीजें बरामद की हैं। इनमें मोबाइल फोन, अलग-अलग सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, कई बैंकों की चेकबुक, पीओएस मशीन और संदिग्ध दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस इन सभी सामानों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किसी अन्य धोखाधड़ी में भी हुआ है या नहीं।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
ईओडब्ल्यू का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांच के दौरान इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर लोन मंजूर कराने तक इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई प्रॉपर्टी और बैंकिंग से जुड़े बड़े फर्जीवाड़ों पर लगाम लगाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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