दिल्ली लक्ष्मी योजना पर हाईकोर्ट सख्त, MP-MLA की सिफारिश जरूरी करने पर उठाए सवाल
दिल्ली लक्ष्मी योजना में लाभ लेने के लिए सांसद या विधायक की सिफारिश अनिवार्य किए जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि पात्रता जांचने के लिए जरूरी दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद MP-MLA की सिफारिश को जरूरी क्यों किया गया।
दिल्ली लक्ष्मी योजना पर हाईकोर्ट सख्त, MP-MLA की सिफारिश जरूरी करने पर उठाए सवाल
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दिल्ली सरकार की दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार से एक अहम सवाल पूछा है। कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर आपत्ति जताई है कि योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय सांसद या विधायक की सिफारिश को अनिवार्य क्यों बनाया गया है। कोर्ट का कहना है कि अगर सांसद या विधायक की सिफारिश सिर्फ एक विकल्प होती, तो शायद कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन जब सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए इसे जरूरी बना दिया गया है, तो सरकार को इसके पीछे ठोस कारण बताना होगा।


हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने दिल्ली सरकार से इस मामले में 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आखिर सांसद या विधायक से सिफारिश लेने की व्यवस्था क्यों लागू की गई और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी सरकारी योजना में बिना उचित कारण के ऐसी शर्त लगाना मनमानी की स्थिति पैदा कर सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी।


जनहित याचिका में शर्त को दी गई चुनौती

दिल्ली लक्ष्मी योजना में MP-MLA की सिफारिश को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका पूर्व कांग्रेस पार्षद अभिषेक दत्त और मौजूदा पार्षद वेदपाल शीतल चौधरी की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की मदद के लिए बनाई गई है। ऐसे में इसका लाभ लेने के लिए किसी राजनीतिक प्रतिनिधि की सिफारिश जरूरी करना सही नहीं है। याचिका में आशंका जताई गई है कि इससे सांसद या विधायक अपनी पसंद के आधार पर सिफारिश देने या रोकने की स्थिति में आ सकते हैं और सरकारी सहायता राजनीतिक सिफारिश पर निर्भर हो सकती है।


दस्तावेजों से पात्रता जांचने का सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक अहम सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की पात्रता जांचने के लिए आय प्रमाण पत्र, दिल्ली का निवास प्रमाण और दूसरे जरूरी दस्तावेज लिए जा सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि जब सरकारी दस्तावेजों से पात्रता की जांच संभव है, तो सांसद या विधायक की सिफारिश को अनिवार्य बनाने की जरूरत आखिर क्यों है? यही सवाल अब दिल्ली सरकार को अपने हलफनामे में स्पष्ट करना होगा।


सरकार ने क्या कहा?

दिल्ली सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था दूसरे राज्यों में भी मौजूद है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि इस योजना से अब तक करीब 6.1 लाख लाभार्थी जुड़ चुके हैं। सरकार का दावा है कि सांसद या विधायक की सिफारिश से जुड़ी व्यवस्था के पीछे एक तार्किक आधार है। हालांकि, कोर्ट सरकार के मौखिक जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ और लिखित रूप में इस शर्त का स्पष्ट कारण बताने को कहा।


क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना?

दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। योजना का लाभ 21 से 60 साल की पात्र महिलाओं को दिया जाना है। इसके लिए परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये तक होनी चाहिए। योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू की गई है।


किन महिलाओं को मिलेगा लाभ?

योजना के तहत कई पात्रता शर्तें भी रखी गई हैं। सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता और दूसरी पेंशन या आर्थिक सहायता पाने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार, कुछ विशेष बिजली खपत सीमा से ऊपर वाले परिवार और कुछ अन्य श्रेणियों को भी योजना से बाहर रखा गया है। महिला या उसके माता-पिता अथवा पति का कम से कम 10 साल से दिल्ली का निवासी होना और लाभार्थी का दिल्ली का मतदाता होना भी जरूरी बताया गया है।


अब कोर्ट के अगले कदम पर नजर

फिलहाल पूरा विवाद सांसद और विधायक की सिफारिश को अनिवार्य करने वाली शर्त पर केंद्रित है। हाईकोर्ट ने सरकार को इस व्यवस्था का स्पष्ट और ठोस कारण बताने को कहा है। अब 17 अक्टूबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। सरकार के जवाब से यह साफ हो सकता है कि इस शर्त को बनाए रखने के पीछे उसका तर्क क्या है और क्या अदालत इस व्यवस्था में बदलाव का निर्देश देती है।

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