ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली पुलिस अपनी सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पुलिस की स्पेशल सेल ने बम निरोधक रोबोट का डेमो किया है।
इसका मकसद संदिग्ध बम, बारूद या विस्फोटक के पास सीधे पुलिसकर्मी को भेजने के बजाय पहले रोबोट का इस्तेमाल करना है।
50 किलो तक वजन उठाने की क्षमता
डेमो के दौरान बताया गया कि रोबोट करीब 50 किलो तक वजन उठा सकता है। यह क्षमता संदिग्ध सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या सुरक्षित तरीके से संभालने में काम आ सकती है।
ऐसे उपकरणों का मुख्य फायदा यह होता है कि पुलिसकर्मी कुछ दूरी से ऑपरेशन को नियंत्रित कर सकते हैं।
पुलिस मुख्यालय में हुआ डेमो
24 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पुलिस मुख्यालय में रोबोट का प्रदर्शन किया। इस दौरान उसकी कार्यक्षमता दिखाई गई।
दिल्ली जैसे बड़े शहर में बम की संदिग्ध सूचना मिलने पर समय और सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल पुलिस के लिए अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प बन सकता है।
बम निरोधक ऑपरेशन कितना जोखिम भरा?
संदिग्ध बम को देखकर यह पता लगाना आसान नहीं होता कि उसमें क्या है। किसी भी गलती से बड़ा हादसा हो सकता है।
यही कारण है कि बम निरोधक दस्ते विशेष प्रशिक्षण के साथ काम करते हैं। रोबोट का इस्तेमाल ऐसे ऑपरेशन में इंसान और संदिग्ध वस्तु के बीच दूरी बनाए रखने में मदद कर सकता है।
रोबोट कैसे मदद करेगा?
दूर से नियंत्रित किए जाने वाले ऐसे रोबोट में कैमरा और अलग-अलग उपकरण लगाए जा सकते हैं। इससे ऑपरेटर दूर रहकर संदिग्ध वस्तु को देख सकता है और स्थिति के अनुसार उसे संभाल सकता है।
हालांकि किसी रोबोट की वास्तविक क्षमता उसके मॉडल और इस्तेमाल किए गए उपकरणों पर निर्भर करती है।
दिल्ली में क्यों जरूरी?
दिल्ली देश की राजधानी है। यहां बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान और भीड़भाड़ वाले इलाके हैं।
किसी संदिग्ध वस्तु की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करना जरूरी होता है। रोबोट ऐसी परिस्थितियों में पुलिस को एक सुरक्षित विकल्प दे सकता है।
इंसान की जगह पूरी तरह नहीं
यह तकनीक पुलिसकर्मियों को पूरी तरह रिप्लेस नहीं करेगी। बम निरोधक विशेषज्ञों की भूमिका बनी रहेगी।
रोबोट को एक सुरक्षा उपकरण के तौर पर देखा जाना चाहिए, जो विशेषज्ञों को खतरे से दूरी बनाकर काम करने में मदद करे।
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