ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-78 में एक जर्जर पड़ी इमारत को लेकर हुई पुलिस जांच ने इलाके के लोगों को भी हैरान कर दिया है। जिस जगह को लोग लंबे समय से सुनसान और बेकार इमारत समझ रहे थे, वहां कथित तौर पर कुछ लोग अपराध से जुड़े कामों के लिए आने-जाने वालों पर नजर रखते थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी इलाके की भौगोलिक स्थिति से अच्छी तरह परिचित थे। इसी वजह से वह सुनसान जगहों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते थे।
सुरक्षा गार्ड की नौकरी से मिली जानकारी
जांच में पुलिस ने पाया कि आरोपी कुणाल ग्रेटर फरीदाबाद की कुछ खंडहर पड़ी इमारतों में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करता था। इस वजह से उसे इमारतों और आसपास के रास्तों की पूरी जानकारी थी। दूसरी तरफ दीपक खंडहर के पास चाय की दुकान लगाता था। पुलिस के अनुसार, दोनों आसपास आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखते थे। यानी इलाके की जानकारी और लोगों की गतिविधियों पर नजर रखना आरोपियों के लिए बड़ा फायदा बन गया।
सुनसान जगहों को बनाया निशाना
ऐसी जगहें अक्सर अपराधियों के लिए आसान निशाना बन जाती हैं, जहां लोगों की आवाजाही कम होती है और आसपास रहने वाले लोगों को भी अंदर की गतिविधियों का अंदाजा नहीं होता। पुलिस जांच में आरोपियों पर युवक-युवतियों और राहगीरों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले में नाबालिगों से जुड़े अपराध की भी जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज की। आरोपियों की भूमिका, उनके संपर्क और घटना से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस जगह का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे।
लोगों के लिए भी बड़ा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शहर में खाली और जर्जर पड़ी इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसी जगहों पर न तो पर्याप्त रोशनी होती है और न ही नियमित निगरानी। अगर किसी इलाके में लंबे समय से कोई इमारत खाली पड़ी है, तो उसकी सुरक्षा और नियमित जांच जरूरी है। खासकर उन जगहों पर जहां बच्चे, महिलाएं या राहगीर अक्सर गुजरते हैं। फरीदाबाद के इस मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। अब यह देखना बाकी है कि आरोपियों से पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क के बारे में और क्या जानकारी सामने आती है।
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