ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद घायल पुलिस अधिकारियों की आपबीती सामने आई है। इलाज करा रहे पुलिसकर्मियों का कहना है कि उस रात हालात बेहद गंभीर थे और भीड़ का निशाना सीधे वर्दीधारी पुलिसकर्मी थे। अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान उन पर लाठियों, लोहे की रॉड, ईंट-पत्थरों और अन्य वस्तुओं से हमला किया गया।
इंस्पेक्टर नंद किशोर सिंह ने सुनाई पूरी घटना
घायल इंस्पेक्टर नंद किशोर सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 8:15 बजे उनकी नाइट ड्यूटी थी। वह हनुमान मंदिर रोड पर वाहन खड़ा कर पैदल जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे। शुरुआत में उन्हें लगा कि सामने मौजूद लोग प्रदर्शनकारी छात्र हैं और वह आसानी से निकल जाएंगे। लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति बदल गई। उनके अनुसार, कई लोगों ने अपने चेहरे काले कपड़ों और मास्क से ढके हुए थे तथा उनके हाथों में लाठियां और लोहे की रॉड थीं। इंस्पेक्टर का आरोप है कि भीड़ ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मारपीट के दौरान उनका पर्स और सोने की चेन भी छीन ली गई।
'समय पर साथी नहीं आते तो शायद बचना मुश्किल था'
नंद किशोर सिंह के अनुसार, घटना के समय वहां करीब 150 से 200 लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अन्य पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचते तो उनकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पुलिसकर्मी भी किसी परिवार का हिस्सा होते हैं और वर्दी के पीछे एक इंसान भी होता है।
ACP विवेक भगत का दावा
घायल एसीपी विवेक भगत ने बताया कि वह एक घायल पुलिसकर्मी को बचाने के लिए आगे बढ़े थे। उनके अनुसार, इसी दौरान भीड़ ने उन्हें भी घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। उन्होंने दावा किया कि भीड़ का उद्देश्य केवल प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाना था। फिलहाल उनका इलाज एम्स में चल रहा है।
ACP रोहित सतवान ने क्या कहा?
एसीपी रोहित सतवान ने बताया कि शुरुआत में प्रदर्शनकारियों की ओर से पानी की बोतलें फेंकी गईं। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े और ईंट-पत्थर तथा डंडों से हमला शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि इस हमले में उन्हें भी चोटें आईं। उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हिंसा के कारण कई अधिकारी और जवान घायल हो गए।
घटना की जांच जारी
जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर हुई हिंसा की जांच जारी है। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। अलग-अलग पक्ष घटना के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल में जुटी हैं।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!