ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नई दिल्ली में 1984 सिख विरोधी दंगों के मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके पुराने वकील और पड़ोसी अनिल शर्मा ने उनसे जुड़ी कई बातें साझा की हैं। करीब तीन दशक तक सज्जन कुमार के वकील रहे अनिल शर्मा के लिए उनका निधन सिर्फ एक पुराने मुवक्किल को खोना नहीं, बल्कि एक करीबी साथी से बिछड़ना भी है। सज्जन कुमार के निधन की खबर मिलने पर अनिल शर्मा भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वह उनके लिए सिर्फ मुवक्किल नहीं थे, बल्कि दोस्त और पड़ोसी भी थे।
‘अपना यार था, पड़ोसी था’
अनिल शर्मा ने बताया कि जब उन्हें सज्जन कुमार के निधन की खबर मिली, उस समय वह अदालत में थे। उन्होंने कहा कि खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ।शर्मा के मुताबिक, जेल में रहने के दौरान सज्जन कुमार की तबीयत अक्सर खराब रहती थी। हालांकि, उनका कहना था कि बीमारी से ज्यादा लंबी कानूनी लड़ाई ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया था। उन्होंने बताया कि जेल में मुलाकात के दौरान सज्जन कुमार कई बार भावुक हो जाते थे और रोने लगते थे। उन्हें इस बात की चिंता रहती थी कि अगर वह जेल से बाहर आए तो सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने कैसे जाएंगे।
‘मेरे साथ अन्याय हुआ है’
अनिल शर्मा के मुताबिक, सज्जन कुमार अक्सर कहते थे कि उनके साथ अन्याय हुआ है और वह उन घटनाओं में शामिल नहीं थे। शर्मा ने बताया कि जेल में मुलाकात के दौरान वह अपने मामलों और कानूनी लड़ाई को लेकर काफी परेशान रहते थे। शर्मा के मुताबिक, सज्जन कुमार के खिलाफ कुल नौ मामलों में निचली अदालतों ने आठ मामलों में उन्हें बरी किया था। वहीं, एक मामले में हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। एसआईटी से जुड़े तीन मामलों में भी दो में उन्हें राहत मिली, जबकि एक मामले में सजा हुई। इस सजा के खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित थी।
अदालतों में गंभीर मामलों में हुई थी सजा
हालांकि, अदालती रिकॉर्ड में सज्जन कुमार के खिलाफ दोषसिद्धियां गंभीर मामलों में हुई थीं। 25 फरवरी 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के दंगों के दौरान सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में पालम कॉलोनी में पांच लोगों की हत्या के मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा दी थी। इस मामले में उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी।
लंबी कानूनी लड़ाई का अंत
सज्जन कुमार के जीवन का आखिरी दौर लंबी कानूनी लड़ाई और जेल में बीता। उनके पुराने वकील अनिल शर्मा के मुताबिक, लगातार चलती अदालती प्रक्रिया और जेल की जिंदगी ने उन्हें काफी प्रभावित किया था। वहीं, 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में अदालतों द्वारा सुनाई गई सजाओं के चलते उनका नाम भारतीय राजनीति और न्यायिक इतिहास के सबसे विवादित मामलों से जुड़ा रहा।
उनके निधन के बाद एक तरफ उनके पुराने साथी और वकील उन्हें याद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ 1984 दंगों के पीड़ित परिवारों के लिए उनके खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई और अदालत के फैसले इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।
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