ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में सजा पाए पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ताहिर हुसैन ने कड़कड़डूमा कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।उनकी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है। ताहिर हुसैन पहले ही कह चुके हैं कि वह निचली अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
अंकित शर्मा की हत्या फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में हुई थी। बाद में उनका शव एक नाले से बरामद किया गया था। इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी ठहराया था। दोषियों में ताहिर हुसैन के अलावा नजीर, आसिम, जावेद और अनस शामिल थे। 31 जुलाई को कोर्ट ने सभी पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये और बाकी चार दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
अब हाईकोर्ट में चुनौती
निचली अदालत के फैसले के बाद ताहिर हुसैन ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है। अपनी याचिका में उन्होंने दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है। सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय ताहिर हुसैन ने मीडिया से कहा था कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने उस समय ही संकेत दिया था कि मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा था, ‘देर है, अंधेर नहीं।’ अब हाईकोर्ट में उनकी अपील पर होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाता है या मामले में कोई और कानूनी राहत मिलती है।
अभियोजन ने मांगी थी मौत की सजा
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने सभी पांच दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। अभियोजन की ओर से दलील दी गई थी कि हत्या बेहद गंभीर और जघन्य अपराध है और इसे दुर्लभतम श्रेणी में माना जाना चाहिए। विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने कोर्ट के सामने मृत्युदंड की मांग करते हुए कहा था कि अपराध में अत्यधिक क्रूरता दिखाई गई। अभियोजन ने अंकित शर्मा के शरीर पर मिली चोटों का भी उल्लेख किया था। कोर्ट को बताया गया था कि उनके शरीर पर 51 चोटों के निशान मिले थे, जिनमें सात चोटें ऐसी थीं जो अकेले ही मौत का कारण बनने के लिए पर्याप्त थीं।
बचाव पक्ष ने किया था मौत की सजा का विरोध
वहीं, ताहिर हुसैन की ओर से पेश हुए वकील राजीव मोहन ने मृत्युदंड की मांग का विरोध किया था। बचाव पक्ष ने कोर्ट से नरम रुख अपनाने की अपील की थी।अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सजा को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में कोर्ट ने सभी पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर
अंकित शर्मा हत्याकांड में निचली अदालत के फैसले के बाद अब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। ताहिर हुसैन की अपील पर होने वाली सुनवाई इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव होगी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष निचली अदालत के फैसले और उपलब्ध सबूतों को चुनौती दे सकता है, जबकि अभियोजन पक्ष दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखने की दलील रख सकता है। फिलहाल ताहिर हुसैन की उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर हाईकोर्ट की सुनवाई का इंतजार है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!