ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अफगानिस्तान के पूर्वी नूरिस्तान प्रांत में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार 100 से अधिक लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल लगातार मलबे में दबे लोगों और शवों की तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन खराब मौसम और दुर्गम इलाके राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ में दर्जनों इमारतें ढह गईं और कई गांव पूरी तरह प्रभावित हो गए। प्रांत की राजधानी पारुन भी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री, तालिबान ने जताया आभार
इस भीषण आपदा के बीच भारत ने एक बार फिर मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणदीप जायसवाल ने जानकारी दी कि भारत ने राहत सामग्री की नई खेप अफगानिस्तान भेजी है। इस राहत सामग्री में खाद्य सामग्री, टेंट और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। इन्हें प्रभावित परिवारों तक पहुंचाने के लिए अफगानिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंप दिया गया है। भारत ने कहा कि वह इस कठिन समय में अफगानिस्तान की जनता के साथ खड़ा है और राहत कार्यों में हरसंभव सहयोग जारी रखेगा। भारत की इस मदद पर तालिबान प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया है।
सैकड़ों घायल और कई लोग अब भी लापता
स्थानीय पत्रकार बिलाल सरवरी ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि पारुन क्षेत्र में ही कम से कम 100 लोगों की मौत, 500 से अधिक लोगों के घायल होने और 160 से ज्यादा लोगों के लापता होने की आशंका है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ये शुरुआती आंकड़े हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कई सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे राहत टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है।
मेयर की भी मौत, राहत कार्यों पर असर
इस आपदा में पारुन के मेयर सैयद अहमद अरहबी की भी मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहा था और अब वरिष्ठ अधिकारियों की मौत से राहत एवं बचाव कार्य और अधिक प्रभावित हुए हैं। घर, दुकानें, बाजार, सड़कें और पुल या तो बह गए हैं या फिर मलबे के नीचे दब गए हैं। बचाव दल सीमित संसाधनों और साधारण उपकरणों की मदद से लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
अभी टला नहीं खतरा
अफगान मौसम विभाग ने देश के 34 में से 10 प्रांतों में और भारी बारिश तथा फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से विशेष खोज एवं बचाव दल, हेलीकॉप्टर, इंजीनियरिंग उपकरण, चिकित्सा सहायता, मोबाइल क्लीनिक, खाद्य सामग्री, स्वच्छ पेयजल और अस्थायी आश्रयों की तत्काल जरूरत बताई है।
पहले भी झेल चुका है बाढ़ की मार
नूरिस्तान एक पहाड़ी इलाका है, जहां पिछले कुछ वर्षों में कई बार विनाशकारी बाढ़ आ चुकी है। वर्ष 2024 में अफगानिस्तान में आई बाढ़ से 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2026 की शुरुआत में ही बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 110 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अफगानिस्तान के कई हिस्सों में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। ऐसे समय में भारत सहित कई देशों की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री प्रभावित लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
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