ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले कुछ समय से कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इसी बीच बांग्लादेश की ओर से भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की बात सामने आई है। वहां की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भारत से बिजनेस वीजा की प्रक्रिया आसान करने और दोनों देशों के कारोबारियों के बीच आवाजाही बढ़ाने की जरूरत बताई है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को बांग्लादेश में निवेश के लिए आमंत्रित भी किया।
शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि भारत आने वाले बांग्लादेशी कारोबारियों के लिए बिजनेस वीजा जल्दी जारी होना चाहिए। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए कारोबारियों का एक-दूसरे के देश में आसानी से आना-जाना जरूरी है।
उनकी इस मांग को मौजूदा आर्थिक रिश्तों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। बांग्लादेश चाहता है कि व्यापार से जुड़ी प्रशासनिक देरी कम हो और निजी क्षेत्र के लोगों के बीच बातचीत ज्यादा बढ़े।
बांग्लादेश की सरकार ने भारतीय कंपनियों को अपने यहां निवेश करने का न्योता दिया है। खास तौर पर रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और जूट जैसे सेक्टर में निवेश की उम्मीद जताई गई है।
शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश में बड़ा घरेलू बाजार और उत्पादन की अच्छी क्षमता है। उनका कहना है कि वहां मौजूद स्पेशल इकोनॉमिक जोन भारतीय कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग का अच्छा विकल्प बन सकते हैं। साथ ही बांग्लादेश ऐसे निवेश को बढ़ावा देना चाहता है जिससे नई तकनीक आए, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और स्थानीय सप्लायर्स को भी फायदा हो।
बांग्लादेश भारत को अपना प्रमुख व्यापारिक साझेदार मानता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी तक दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 11.35 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था। इसके बावजूद बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री ने माना कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार उनकी वास्तविक क्षमता से काफी कम है।
यही वजह है कि ढाका अब व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलने पर जोर दे रहा है। अगर दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधा संपर्क बढ़ता है और वीजा तथा दूसरे प्रशासनिक काम आसान होते हैं, तो इसका असर व्यापार पर भी पड़ सकता है।
भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। ऐसे माहौल में आर्थिक साझेदारी बढ़ाने की अपील काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। बांग्लादेश की तरफ से भारतीय कंपनियों को निवेश के लिए बुलाना बताता है कि वह आर्थिक क्षेत्र में दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए भी बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी और व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने से सिर्फ बड़े कारोबारियों को नहीं, बल्कि रोजगार और स्थानीय उद्योगों को भी फायदा हो सकता है।
फिलहाल बांग्लादेश की तरफ से बिजनेस वीजा आसान करने, व्यापार की रुकावटें कम करने और भारतीय निवेश बढ़ाने की मांग सामने आई है। अब यह देखना अहम होगा कि इन प्रस्तावों पर आगे दोनों देशों के बीच किस तरह की बातचीत होती है और क्या इसका असर जमीनी स्तर पर व्यापारिक रिश्तों में भी दिखाई देता है
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