ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दुनिया की नजर इस समय भारत पर है, क्योंकि नई दिल्ली में BRICS का बड़ा शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाली इस बैठक में कई बड़े देशों के नेता एक मंच पर दिखाई देंगे। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी वजह से सम्मेलन की मेजबानी की जिम्मेदारी भी भारत के पास है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं माना जा रहा। दुनिया में तेजी से बदलते राजनीतिक और आर्थिक हालात के बीच BRICS देशों के बीच सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में 350 से ज्यादा बैठकें आयोजित की हैं। इसका मकसद BRICS को सिर्फ नेताओं की बैठक तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, तकनीक, संस्कृति और दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना रहा है।
इस बार का एजेंडा क्या होगा?
भारत ने इस साल BRICS Summit के लिए एक खास थीम रखी है—Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability। आसान भाषा में कहें तो इसका फोकस ऐसे विकास पर है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी टिक सके, नई तकनीक को बढ़ावा दे, देशों के बीच सहयोग बढ़ाए और पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर हो। बैठक में आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विकास से जुड़े मुद्दे अहम रह सकते हैं। इसके अलावा दुनिया में चल रहे युद्ध और बढ़ते तनाव का असर भी बैठक पर देखने को मिल सकता है। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के साथ रूस के रिश्ते और वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा की संभावना है।
पुतिन के साथ मोदी की मुलाकात पर नजर
BRICS Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय मुलाकात भी काफी चर्चा में है। भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा और परमाणु सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत होती रही है। ऐसे समय में जब रूस अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है और वैश्विक राजनीति में कई बड़े बदलाव हो रहे हैं, मोदी-पुतिन मुलाकात का महत्व और बढ़ जाता है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग, ऊर्जा और व्यापार जैसे मुद्दे दोनों नेताओं की बातचीत में प्रमुख हो सकते हैं। रूस के अत्याधुनिक Su-57 लड़ाकू विमान को लेकर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है।
चीन और शी जिनपिंग की मौजूदगी भी अहम
BRICS की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी भी भारत के लिए महत्वपूर्ण होगी। भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव देखने को मिला है। सीमा विवाद से लेकर व्यापार और रणनीतिक मुद्दों तक दोनों देशों के बीच कई ऐसे विषय हैं जिन पर लगातार बातचीत होती रही है। ऐसे में एक ही मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मौजूदगी दुनिया के लिए भी दिलचस्प होगी। BRICS के मंच पर दोनों देशों के बीच सहयोग की बात होगी, लेकिन इसके साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि क्या दोनों देश अपने आपसी मतभेदों को लेकर कोई सकारात्मक संकेत देते हैं।
अमेरिका और ट्रंप का मुद्दा भी चर्चा में
BRICS Summit में अमेरिका की भूमिका सीधे तौर पर सदस्य देश के रूप में नहीं है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और BRICS को लेकर उनकी नीतियां चर्चा का हिस्सा जरूर बन सकती हैं। BRICS का विस्तार होने के बाद इसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों की नजर भी इस समूह की गतिविधियों पर रहती है। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह BRICS देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ अपने रिश्तों में भी संतुलन बनाए रखे।
ईरान की मौजूदगी भी बनाएगी माहौल खास
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी भी इस सम्मेलन को खास बनाती है। पश्चिम एशिया में लगातार तनाव के बीच ईरान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे BRICS देशों के लिए अहम हैं। ऐसे में ईरान के साथ सहयोग और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हो सकती है। भारत के लिए ईरान के साथ रिश्ते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, खासकर व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से।
भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक मौका
BRICS Summit भारत के लिए सिर्फ मेजबानी का कार्यक्रम नहीं है। यह देश को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने अपनी प्राथमिकताएं रखने का मौका भी देता है। भारत एक तरफ ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका, रूस, चीन, यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने रिश्तों में संतुलन बनाए रखना चाहता है। इस सम्मेलन में भारत यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि बदलती दुनिया में विकास, व्यापार और तकनीक के मुद्दों पर देशों को साथ आना चाहिए।
आने वाले दिनों में नई दिल्ली में होने वाली बैठकों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। कौन सा देश किस मुद्दे पर भारत के साथ खड़ा होता है, किन मुद्दों पर सहमति बनती है और किन मामलों में मतभेद सामने आते हैं—ये सभी बातें BRICS Summit को खास बनाएंगी। कुल मिलाकर 2026 का BRICS Summit भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक—तीनों ही नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!