ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन इस समय दुनिया की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और राजधानी दिल्ली में संगठन की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में दुनिया के कई बड़े देशों के नेता एक मंच पर दिखाई देंगे। सबसे ज्यादा नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर हैं। तीनों देशों का वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में काफी प्रभाव है। ऐसे में इन नेताओं की मौजूदगी ने BRICS सम्मेलन की अहमियत और बढ़ा दी है।
BRICS के मंच पर जुटेंगे बड़े नेता
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ और इसमें कई नए देश शामिल हुए। आज यह सिर्फ कुछ देशों का आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। दिल्ली में होने वाली बैठक में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।इसके अलावा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे तनाव और बदलते राजनीतिक समीकरण भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
मोदी-पुतिन-शी पर क्यों टिकी नजर?
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खासियत तीन बड़े नेताओं की मौजूदगी है। प्रधानमंत्री मोदी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी बैठक में शामिल होंगे। भारत और रूस के संबंध काफी पुराने हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से जारी है। वहीं चीन भारत का पड़ोसी देश होने के साथ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बदल रही है दुनिया की राजनीति
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया की राजनीति तेजी से बदली है। अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन और भारत जैसे बड़े देशों के बीच संबंधों का असर वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर दिखाई देता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई नए समीकरण बने हैं। पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव बढ़ा है। इसी दौरान भारत ने अलग-अलग देशों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित रखने की कोशिश की है। BRICS का बढ़ता आकार भी इसी बदलती दुनिया का एक संकेत माना जाता है। संगठन में शामिल देशों की बड़ी आबादी और मजबूत अर्थव्यवस्थाएं इसे वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण बनाती हैं।
क्या BRICS नया वैश्विक संतुलन बना सकता है?
BRICS को लेकर अक्सर यह चर्चा होती है कि क्या यह संगठन दुनिया की मौजूदा व्यवस्था को बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। कुछ विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BRICS का विस्तार वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। हालांकि इसे सीधे किसी एक देश या समूह के खिलाफ खड़ा करना सही नहीं होगा। BRICS के सदस्य देशों के अपने-अपने हित और अलग-अलग नीतियां हैं। कई मुद्दों पर उनके बीच सहमति होती है, तो कई मामलों में मतभेद भी दिखाई देते हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि BRICS किसी मौजूदा वैश्विक शक्ति व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा। लेकिन इतना जरूर है कि संगठन का बढ़ता प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई चर्चा जरूर पैदा कर रहा है।
भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक मौका
BRICS की अध्यक्षता भारत को अपनी प्राथमिकताएं दुनिया के सामने रखने का अवसर दे रही है। भारत लगातार विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की बात करता रहा है। भारत चाहता है कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले। इसके साथ ही व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और वित्त जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं है। यह अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने और अपनी कूटनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाने का मौका भी है।
आर्थिक सहयोग पर भी रहेगा जोर
BRICS की ताकत का एक बड़ा हिस्सा इसकी अर्थव्यवस्थाओं से आता है। संगठन में दुनिया की कई बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। बैठक के दौरान स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, निवेश, बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था जैसे विषयों पर भी बातचीत हो सकती है। अगर सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और नए बाजारों तक पहुंच जैसे मुद्दे भी काफी महत्वपूर्ण हैं।
भारत-रूस संबंधों पर भी नजर
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा और ऊर्जा के साथ-साथ व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। रूस भारत के लिए लंबे समय से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक से द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर नए संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
चीन के साथ बातचीत भी अहम
भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव रहा है। सीमा से जुड़े मुद्दों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव भी रहा है, लेकिन हाल के समय में बातचीत और संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें भी दिखाई दी हैं। अगर BRICS के दौरान मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात होती है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि किसी भी बड़े बदलाव का आकलन बैठक के बाद होने वाली बातचीत और उसके नतीजों से ही किया जा सकेगा।
दुनिया की नजर दिल्ली पर
BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति एक बदलाव के दौर से गुजर रही है। आर्थिक ताकत, सुरक्षा, तकनीक और व्यापार को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक से कई बड़े राजनीतिक और आर्थिक संकेत मिलने की उम्मीद है। मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की मौजूदगी इसे और खास बना रही है। यह सम्मेलन दुनिया की व्यवस्था को रातोंरात नहीं बदलने वाला, लेकिन आने वाले वर्षों में वैश्विक सहयोग और शक्ति संतुलन किस दिशा में जाएगा, इसे समझने के लिए BRICS 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर साबित हो सकता है।
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