ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने भारत को दुनिया की महान शक्तियों में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले लंबे समय तक वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता रहेगा। लैंडौ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस महीने भारत दौरे पर आने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
‘भारत की भूमिका इस सदी में बहुत बड़ी’
SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट में बोलते हुए क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और आने वाले समय में भी उसकी स्थिति बेहद मजबूत रहने वाली है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया की महान शक्तियों में से एक है। इसमें कोई शक नहीं है। इस सदी के इतिहास में भारत की भूमिका बहुत बड़ी होने वाली है।”
लैंडौ ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत की सफलता की कहानी का हिस्सा बनना चाहता है। उनका कहना था कि वैश्विक मंच पर भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका इस बदलाव को अच्छी तरह समझता है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में
अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं है।
लैंडौ ने कहा, “हम महीनों से कह रहे हैं कि हम इस समझौते के बेहद करीब हैं और मुझे सच में लगता है कि अब आखिरी रुकावट को पार करना बाकी है।” उन्होंने कहा कि इस डील के पूरा होने के बाद दोनों देश कई अन्य अहम मुद्दों पर भी तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।
मार्को रुबियो का भारत दौरा अहम
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 24 से 26 मई 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। इस दौरान वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा मार्को रुबियो 26 मई को होने वाली QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भी मौजूद रहेंगे।
ट्रंप प्रशासन के बाद तेज हुई बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत ट्रंप प्रशासन के समय से लगातार चल रही है। पिछले साल दोनों देशों के बीच एक समझौते की दिशा में प्रगति हुई थी, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ खत्म किए जाने के बाद बातचीत नए सिरे से शुरू करनी पड़ी। अब दोनों देश बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं।
2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और अमेरिका ने मिलकर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। भारत खासतौर पर अमेरिकी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए उत्सुक है। वहीं अमेरिका भी भारत को एशिया में एक मजबूत रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेड डील पूरी हो जाती है तो इससे दोनों देशों के व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बड़ा फायदा मिलेगा।
वैश्विक मंच पर मजबूत हो रहे रिश्ते
हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा, तकनीक, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी बढ़ी है। क्रिस्टोफर लैंडौ का बयान भी इसी बदलते वैश्विक समीकरण का संकेत माना जा रहा है, जहां भारत को अब दुनिया की बड़ी ताकतों में गिना जा रहा है।
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