ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप के अनुसार इस नीति का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं का उत्पादन दोबारा अमेरिका में बढ़ाना और घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग को मजबूत करना है। नई नीति के तहत 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक आयातित जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसके बाद 2028 से एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा और फिर इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
ट्रंप ने क्या कहा?
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने कहा कि जो कंपनियां तय समय सीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां और जरूरी उपकरण स्थापित नहीं करेंगी, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह नीति केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगी। पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
भारत पर क्यों पड़ सकता है बड़ा असर?
भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता माना जाता है और उसे अक्सर "फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड" कहा जाता है। अमेरिका में बिकने वाली जेनेरिक दवाओं का बड़ा हिस्सा भारत से आता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को लगभग 9.7 अरब डॉलर की फार्मास्युटिकल दवाओं का निर्यात किया, जो भारत के कुल फार्मा निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत था। मात्रा (वॉल्यूम) के हिसाब से अमेरिकी बाजार में भारतीय जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। ऐसे में यदि भविष्य में 100% और फिर 200% टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय दवा कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
कौन-कौन सी दवाएं हो सकती हैं प्रभावित?
भारत में बनने वाली जेनेरिक दवाएं अमेरिका में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य जैसी कई गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2024 में अमेरिका में गर्भनिरोधक गोलियों के लगभग 65 प्रतिशत प्रिस्क्रिप्शन भारत की कंपनियों ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स और ल्यूपिन द्वारा निर्मित दवाओं के थे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में मजबूत मौजूदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्या तुरंत असर पड़ेगा?
फिलहाल इस घोषणा का भारतीय दवा उद्योग पर तत्काल प्रभाव पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि प्रस्तावित टैरिफ चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच पहले से व्यापार वार्ताएं जारी हैं। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में जेनेरिक दवाओं और फार्मा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात भी शामिल रही है।
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए आगे की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित टैरिफ पूरी तरह लागू होते हैं, तो भारतीय दवा कंपनियों को अमेरिका में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने, नई निवेश योजनाएं बनाने या अपनी निर्यात रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताओं और नीति संबंधी फैसलों पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। भारत का फार्मा उद्योग अमेरिकी बाजार का अहम साझेदार है, इसलिए इस मुद्दे पर आगे होने वाली बातचीत पूरे सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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