ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अगस्त 2026 के आखिरी दिनों में दुनिया की कूटनीति में एक दिलचस्प तस्वीर दिखाई दे रही है। भारत और उसके आसपास के कई बड़े नेता और अधिकारी एक साथ अलग-अलग देशों के दौरे पर हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन में हैं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस का दौरा कर चुके हैं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जापान में कारोबार और निवेश पर बातचीत कर रहे हैं और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कनाडा और अमेरिका के दौरे पर हैं।
इसी दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ रूस पहुंचे हैं। दूसरी तरफ RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी चीन पहुंची हैं। अलग-अलग नजरिए से देखें तो ये सामान्य राजनयिक यात्राएं लग सकती हैं, लेकिन एक साथ इनका होना वैश्विक राजनीति में कई महत्वपूर्ण संकेत देता है।
रूस पहुंचे CIA चीफ रैटक्लिफ
CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ का 25 अगस्त को मॉस्को पहुंचना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। CIA प्रमुख बनने के बाद यह उनकी रूस की पहली यात्रा बताई जा रही है। इससे पहले 2021 में तत्कालीन CIA निदेशक विलियम बर्न्स रूस गए थे। रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं।
हालांकि उनकी यात्रा के एजेंडे को लेकर अमेरिका या रूस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रूस के साथ-साथ ईरान का मुद्दा भी अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है। मॉस्को और तेहरान के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर वॉशिंगटन की अपनी चिंताएं हैं। ऐसे में रैटक्लिफ का दौरा केवल खुफिया सहयोग तक सीमित है या इसका कोई बड़ा रणनीतिक पहलू भी है, इस पर नजर बनी हुई है।
डोभाल चीन में, सीमा वार्ता का 25वां दौर
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 25 अगस्त को बीजिंग पहुंचे। उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं वार्ता की। बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा हुई। डोभाल की चीन यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के समय में भारत और चीन के रिश्तों में कुछ सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं। आने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत भी बढ़ रही है।
जयशंकर का रूस दौरा, व्यापार से रणनीतिक रिश्तों तक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 और 24 अगस्त को रूस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत-रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के लिए मॉस्को के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
जापान में पीयूष गोयल, निवेश पर नजर
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं। वह करीब 200 सदस्यों वाले भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। दौरे के दौरान टोक्यो, नागोया और ओसाका में कारोबारियों और कंपनियों के साथ बातचीत हो रही है। भारत की कोशिश जापान से निवेश बढ़ाने के साथ हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में सहयोग मजबूत करने की है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
निर्मला सीतारमण के दौरे में निवेश और G20 अहम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के दौरे पर हैं। कनाडा में वह भारत-कनाडा के पहले इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग में हिस्सा लेंगी। ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, AI, तकनीक, निवेश और सप्लाई चेन जैसे मुद्दे इस बातचीत में महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका में वह G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इसके अलावा निवेशकों के साथ बैठकें भी उनके एजेंडे में शामिल हैं। यानी इस दौरे का बड़ा फोकस भारत में विदेशी निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है।
अमेरिका में मोहन भागवत की ग्लोबल आउटरीच
RSS प्रमुख मोहन भागवत भी अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। उनकी यात्रा RSS के शताब्दी वर्ष में वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। अमेरिका में वह भारतीय-अमेरिकी समुदाय से संवाद करेंगे। उनके कार्यक्रमों का उद्देश्य विदेशों में भारतीय और हिंदू समुदायों के साथ संपर्क बढ़ाना और RSS के विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने रखना है।
चीन पहुंचीं मरियम नवाज
पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ भी 25 अगस्त को चार दिन के दौरे पर चीन पहुंचीं। उनके दौरे की शुरुआत शिनजियांग के उरुमकी से हुई। पंजाब और चीन के बीच कृषि, तकनीक और निवेश को बढ़ावा देना इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। स्मार्ट खेती, डिजिटल फसल निगरानी और कृषि तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। यह यात्रा बताती है कि पाकिस्तान भी चीन के साथ केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रांतीय स्तर पर आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
एक साथ इतने दौरे क्यों अहम हैं?
इन सभी यात्राओं को एक साथ देखें तो वैश्विक राजनीति की एक बड़ी तस्वीर सामने आती है। अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर संपर्क की कोशिशें जारी हैं। भारत एक तरफ चीन के साथ सीमा विवाद पर बातचीत कर रहा है, तो दूसरी तरफ रूस के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। इसी समय भारत जापान, अमेरिका और कनाडा के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक और सप्लाई चेन पर ध्यान दे रहा है। पाकिस्तान भी चीन के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ा रहा है।
इससे एक बात साफ दिखाई देती है कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में देश किसी एक खेमे तक सीमित रहने के बजाय अपने हितों के अनुसार अलग-अलग शक्तियों के साथ रिश्ते साध रहे हैं। भारत के लिए भी यही रणनीति महत्वपूर्ण है—रूस के साथ पुराने रणनीतिक रिश्ते, चीन के साथ सीमा और क्षेत्रीय मुद्दे, जापान और पश्चिमी देशों के साथ निवेश व तकनीकी सहयोग। आने वाले महीनों में इन बैठकों और दौरों के नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि बदलती वैश्विक राजनीति में भारत अपनी स्थिति को किस तरह मजबूत करता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!