ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक सीमा-पार आतंकवाद उसकी सरकारी नीति का हिस्सा बना रहेगा, तब तक सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) स्थगित रहेगी। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद और भरोसे पर आधारित सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा।
पाकिस्तान के आरोपों का भारत ने दिया जवाब
यह मामला तब सामने आया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'प्राकृतिक संसाधन प्रशासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव' विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सिंधु जल संधि और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने एकतरफा और गैर-कानूनी तरीके से सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है।
इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोई देश सीमा-पार आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में बढ़ावा देता है, तब उसके साथ आपसी विश्वास और सद्भाव के आधार पर सहयोग संभव नहीं हो सकता।
'खून और पानी साथ नहीं बह सकते'
भारत ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। यह वही संदेश है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले सार्वजनिक रूप से दोहरा चुके हैं कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।" भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 24 लोगों की जान गई थी और भारत ने इसके लिए पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया था।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का स्पष्ट रुख
भारत के प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस संवैधानिक एवं कानूनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा वास्तविक लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है।
संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्ताव का भी किया जिक्र
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 21 अप्रैल 1948 के प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। इस प्रस्ताव में पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर से अपनी सेना और नागरिकों को हटाने तथा घुसपैठ रोकने की बात कही गई थी। भारत ने कहा कि पाकिस्तान इन ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज करता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भ्रामक दावे करता रहता है।
पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप
भारत ने पाकिस्तान पर उसके नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वहां विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है और हाल के महीनों में कई लोगों की मौत हुई है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय पहले अपने क्षेत्र की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
भारत का संदेश साफ
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि सीमा-पार आतंकवाद समाप्त होने तक सिंधु जल संधि पर उसका रुख नहीं बदलेगा। भारत का कहना है कि आतंकवाद और विश्वास पर आधारित सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। साथ ही भारत ने एक बार फिर दोहराया कि जम्मू-कश्मीर उसके संप्रभु क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे पर उसका रुख पूरी तरह स्पष्ट और अटल है।
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