ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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इजरायल ने हमास के साथ प्रस्तावित हथियार डालने के समझौते को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में गाजा युद्धविराम और शांति योजना की घोषणा के बाद इजरायल की यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है। इजरायल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह अपने हथियार नहीं सौंप देता, तब तक उसकी सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।
'हमास पर भरोसा नहीं किया जा सकता'
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने कहा कि देश की खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि हमास वास्तव में निरस्त्रीकरण नहीं चाहता, बल्कि इस समझौते का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत दोबारा खड़ी करने के लिए कर सकता है। उनके अनुसार, यदि इजरायल समय से पहले अपनी सेना गाजा से हटाता है, तो हमास फिर से पूरे इलाके में अपना नेटवर्क मजबूत कर सकता है और भविष्य में 7 अक्टूबर 2023 जैसे हमलों की पुनरावृत्ति का खतरा बढ़ सकता है।
गाजा के बड़े हिस्से पर इजरायल का नियंत्रण
डोरोन स्पीलमैन ने बताया कि फिलहाल गाजा के 60 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण है। उनका कहना है कि यह सैन्य मौजूदगी सुरक्षा कारणों से जरूरी है और इसे तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डाल देता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "निरस्त्रीकरण का मतलब केवल हथियारों का पूर्ण समर्पण है। इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा।"
हमास ने क्या कहा था?
कुछ दिन पहले हमास ने संकेत दिया था कि वह अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम समझौते के तहत निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया शुरू करने को तैयार है। इस कदम को गाजा संघर्ष खत्म करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना गया था। हालांकि, इजरायल का मानना है कि केवल आंशिक या चरणबद्ध निरस्त्रीकरण पर्याप्त नहीं होगा। उसका कहना है कि जब तक हमास की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं होती, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
क्या है ट्रंप का 20 सूत्रीय गाजा प्लान?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित 20 सूत्रीय गाजा शांति योजना में कई अहम बिंदु शामिल हैं। इनमें हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण, उसके सुरंग नेटवर्क को खत्म करना, गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और गाजा के पुनर्निर्माण की योजना शामिल है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लागू करने से पहले दोनों पक्षों के बीच कई संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
शांति की राह अभी भी कठिन
विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा में स्थायी शांति तभी संभव होगी जब सुरक्षा, राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर व्यापक सहमति बने। फिलहाल इजरायल और हमास के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में ट्रंप की शांति योजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें जरूर हैं, लेकिन इजरायल के ताजा रुख से साफ है कि किसी भी समझौते से पहले वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।
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