ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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इजराइल और फिलिस्तीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच वेस्ट बैंक को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजराइल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने वेस्ट बैंक के E1 इलाके में करीब 1200 घरों वाली नई बस्ती बनाने के लिए टेंडर जारी किया है। इजराइल के इस फैसले का कई पश्चिमी देशों ने कड़ा विरोध किया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी कर इस परियोजना पर चिंता जताई है। इन देशों का कहना है कि E1 में बस्तियों का विस्तार फिलिस्तीनी इलाकों को एक-दूसरे से अलग कर सकता है और भविष्य में दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को नुकसान पहुंचा सकता है।
E1 इलाके में क्या बनने जा रहा है?
E1 क्षेत्र को लेकर इजराइल लंबे समय से निर्माण की योजनाएं बनाता रहा है, लेकिन कई सालों तक यहां बड़े स्तर पर निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। अब सरकार ने करीब 1200 घरों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया है। फिलिस्तीनी पक्ष का कहना है कि अगर यहां बस्ती बनाई जाती है तो वेस्ट बैंक का भौगोलिक संपर्क प्रभावित होगा। इससे फिलिस्तीनी क्षेत्रों के बीच आवाजाही और संपर्क मुश्किल हो सकता है। फिलिस्तीनियों का यह भी तर्क है कि इससे पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक के बीच संपर्क प्रभावित होगा, जिससे भविष्य में स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनाने की योजना को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।
पश्चिमी देशों ने फैसले को बताया अस्वीकार्य
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और कनाडा ने संयुक्त बयान में इजराइल के इस फैसले को अस्वीकार्य बताया है। इन देशों ने कहा कि E1 में बस्तियों का विस्तार वेस्ट बैंक को कई हिस्सों में बांट सकता है। इससे फिलिस्तीनी इलाकों की क्षेत्रीय निरंतरता भी कमजोर होगी। संयुक्त बयान में वेस्ट बैंक में बढ़ती अस्थिरता और फिलिस्तीनियों के खिलाफ बसने वालों की हिंसा का भी जिक्र किया गया। इन देशों ने कहा कि फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर मौजूद दबाव के बीच इस तरह की परियोजना स्थिति को और खराब कर सकती है।
उनका कहना है कि ऐसी योजनाएं इजराइल और फिलिस्तीन के बीच शांति की कोशिशों को और मुश्किल बना सकती हैं और इजराइल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भी असर डाल सकती हैं।
UN ने भी जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी E1 परियोजना को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीन के भविष्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। बेल्जियम के विदेश मंत्री ने भी इसी तरह की चिंता जाहिर की है। हालांकि, इजराइल सरकार इन आलोचनाओं से सहमत नहीं है और उसने पश्चिमी देशों की आपत्तियों को खारिज किया है।
1967 से जारी है बस्तियों का विवाद
वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पर 1967 के युद्ध के दौरान इजराइल का कब्जा हुआ था। इसके बाद से इन इलाकों में इजराइली बस्तियों का विस्तार होता रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वेस्ट बैंक में करीब 160 इजराइली बस्तियां हैं, जिनमें लगभग 7 लाख इजराइली रहते हैं। दूसरी ओर, इसी इलाके में करीब 33 लाख फिलिस्तीनी भी रहते हैं।
फिलिस्तीनी इन इलाकों को भविष्य में बनने वाले अपने स्वतंत्र देश का हिस्सा मानते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन बस्तियों को लेकर लगातार आपत्तियां उठती रही हैं, लेकिन इजराइल की अलग-अलग सरकारों ने इनके विस्तार को आगे बढ़ाया है। E1 परियोजना के चलते एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या वेस्ट बैंक में बढ़ती बस्तियां भविष्य में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को और मुश्किल बना देंगी।
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