ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पाकिस्तान के कराची में एक अस्पताल से जुड़ा HIV संक्रमण का मामला बेहद गंभीर रूप ले चुका है। अस्पताल में इलाज कराने वाले बच्चों के बीच संक्रमण फैलने की खबर के बाद अब सिंध हाई कोर्ट ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, अब तक 6 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 94 बच्चों में HIV संक्रमण की पुष्टि हुई है। अदालत ने प्रभावित बच्चों को लंबे समय तक इलाज उपलब्ध कराने और उचित मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। वहीं, संक्रमण के वास्तविक कारण और अस्पताल में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
नवंबर 2025 में सामने आया था मामला
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस मामले का पहली बार नवंबर 2025 में पता चला था। इसके बाद सिंध के स्वास्थ्य विभाग ने कराची के औद्योगिक इलाके में स्थित कुलसुम बाई वालिका अस्पताल और उसके आसपास के इलाकों में HIV की जांच शुरू की। यह अस्पताल सिंध एम्प्लॉइज सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन यानी SESSI के तहत संचालित होता है। जांच के दौरान अस्पताल में इलाज कराने वाले 94 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई और 6 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई। अस्पताल के आसपास रहने वाले इलाकों में भी करीब 120 अन्य लोगों के संक्रमित होने की बात कही गई है। हालांकि, संक्रमित लोगों की वास्तविक संख्या और संक्रमण फैलने की वजह को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
याचिका के बाद हाई कोर्ट पहुंचा मामला
इस मामले को लेकर अधिवक्ता तारिक मंसूर ने मई में सिंध हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने दावा किया था कि संक्रमण से प्रभावित बच्चों और अन्य लोगों की कुल संख्या करीब 200 तक हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अदालत ने प्रांतीय मुख्य सचिव को स्वतंत्र जांच कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल
सिंध हाई कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कराई गई जांच और पेश की गई रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं देती हैं। अदालत ने संक्रमण से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच की जरूरत बताई। इनमें संक्रमित लोगों की वास्तविक संख्या, संक्रमण फैलने का स्रोत, अस्पताल में संक्रमण रोकने के नियमों का पालन और डिस्पोजेबल सिरिंज से जुड़े नियमों का पालन जैसे मुद्दे शामिल हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी होगी जांच
कोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक सामने आई रिपोर्टों में जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हुई है। अदालत के मुताबिक, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा। इसलिए स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग प्रक्रिया के जरिए सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। इस जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि अस्पताल में संक्रमण रोकने के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं और अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
प्रभावित बच्चों को इलाज और मुआवजा
हाई कोर्ट ने प्रभावित बच्चों के इलाज को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने लंबे समय तक मेडिकल ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने और उचित मुआवजा देने की बात कही है। अब स्वतंत्र जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अस्पताल में HIV संक्रमण फैलने की असली वजह क्या थी। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि कहीं अस्पताल की व्यवस्था, संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन ने इस मामले को गंभीर बनाने में भूमिका तो नहीं निभाई। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच का इंतजार है। अदालत के निर्देश के बाद उम्मीद है कि संक्रमण के स्रोत, प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या और जिम्मेदारी से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आएगा।
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