ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ पढ़ाई, नौकरी, रिसर्च या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। साइबर सुरक्षा की दुनिया में भी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नॉर्थ कोरिया से जुड़े एक कुख्यात हैकिंग ग्रुप पर AI का इस्तेमाल साइबर हमलों को ज्यादा खतरनाक और ऑटोमेट करने के लिए करने का आरोप लगा है। दक्षिण कोरिया की साइबर सुरक्षा कंपनी Genians ने सोमवार, 10 अगस्त को अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया से जुड़े Kimsuky ग्रुप ने कई ऐसे AI टूल्स और तकनीकों का इस्तेमाल किया, जो संवेदनशील जानकारी के विश्लेषण और साइबर हमलों में मदद कर सकते हैं।
Kimsuky कौन है?
Kimsuky को लंबे समय से नॉर्थ कोरिया से जुड़े साइबर ऑपरेशंस के लिए जाना जाता है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस ग्रुप पर जासूसी, डेटा चोरी और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े साइबर अभियानों में शामिल होने के आरोप लगाते रहे हैं। अमेरिका के वित्त विभाग ने 2023 में Kimsuky पर प्रतिबंध भी लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह ग्रुप नॉर्थ कोरियाई नेता किम जोंग उन की सरकार के रणनीतिक उद्देश्यों के लिए खुफिया जानकारी जुटाने में मदद करता है।
AI से क्या कर रहे हैं हैकर्स?
Genians के मुताबिक, Kimsuky ने कुछ AI मॉडल्स को अपने ही कंप्यूटर सिस्टम पर चलाने और मैनेज करने के लिए टूल्स तैयार किए थे। इनमें Ollama, GPT4All और Msty जैसे प्लेटफॉर्म शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा, ग्रुप द्वारा Retrieval-Augmented Generation यानी RAG तकनीक का इस्तेमाल किए जाने के भी सबूत मिले हैं। यह तकनीक किसी सिस्टम को बड़े दस्तावेजों में मौजूद जानकारी खोजने और उसका इस्तेमाल करने में मदद करती है। इसका एक अहम पहलू यह है कि संवेदनशील दस्तावेजों को किसी बाहरी AI सर्विस पर भेजे बिना स्थानीय सिस्टम पर ही प्रोसेस किया जा सकता है।
चोरी किए गए डेटा का AI से विश्लेषण?
साइबर सुरक्षा कंपनी का दावा है कि Kimsuky सिर्फ AI की मदद से फिशिंग ईमेल या फर्जी संदेश तैयार करने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप AI का इस्तेमाल चोरी किए गए डेटा को समझने और उसका विश्लेषण करने, मैलवेयर तैयार करने और साइबर हमलों को ज्यादा स्वचालित बनाने के लिए कर सकता है। जांच के दौरान AI एजेंट बनाने वाले फ्रेमवर्क, आवाज को टेक्स्ट में बदलने वाला सॉफ्टवेयर और AI की मदद से कोड लिखने वाले टूल Cursor से जुड़े सिस्टम भी मिले। अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
ज्यादा खतरनाक हो सकती है फिशिंग
AI की मदद से साइबर अपराधी फिशिंग कैंपेन को पहले से ज्यादा विश्वसनीय बना सकते हैं। फिशिंग में अपराधी बैंक, कंपनी या किसी भरोसेमंद संस्था का रूप लेकर नकली ईमेल या मैसेज भेजते हैं। इनका मकसद पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल, क्रेडिट कार्ड की जानकारी या दूसरी निजी सूचनाएं चुराना होता है। AI के जरिए ऐसे संदेश ज्यादा प्राकृतिक भाषा में तैयार किए जा सकते हैं और अलग-अलग लोगों के लिए उन्हें ज्यादा व्यक्तिगत बनाया जा सकता है।
क्रिप्टो और फाइनेंस से जुड़े फर्जी दस्तावेज
Genians ने कुछ ऐसे दस्तावेज मिलने की भी बात कही है, जो फाइनेंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े थे। कंपनी के अनुसार, ये दस्तावेज देखने में असली निवेश रिपोर्ट या ऑफिस में इस्तेमाल होने वाले सामान्य दस्तावेजों जैसे लगते थे। हालांकि, इन दस्तावेजों को AI से ही बनाया गया था या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बढ़ता AI साइबर खतरा
नॉर्थ कोरिया पर पहले से ही साइबर जासूसी और वित्तीय चोरी से जुड़े कई आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में अगर AI को इन अभियानों के साथ बड़े पैमाने पर जोड़ा जाता है, तो साइबर हमलों की गति और स्केल दोनों बढ़ सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, लेकिन यह एक छोटे साइबर समूह को कम समय में ज्यादा काम करने की क्षमता जरूर दे सकता है।
फिलहाल Kimsuky के AI इस्तेमाल को लेकर सामने आए दावे साइबर सुरक्षा कंपनी की रिपोर्ट पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन एक बात साफ है—AI की रेस अब सिर्फ टेक्नोलॉजी की रेस नहीं रही, बल्कि साइबर सुरक्षा की नई चुनौती भी बन चुकी है।
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