ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर ब्रिटेन के पूर्व मंत्री रोरी स्टीवर्ट का बयान चर्चा में है। एक पॉडकास्ट में उन्होंने दावा किया कि भारत में चल रहे हालात भविष्य में बांग्लादेश जैसे आंदोलन का रूप ले सकते हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे भारत की राजनीतिक व्यवस्था की गलत समझ बताया।
क्या बोले रोरी स्टीवर्ट?
पॉडकास्ट के दौरान रोरी स्टीवर्ट ने कहा कि CJP के हालिया विरोध प्रदर्शन उन्हें बांग्लादेश के उस आंदोलन की याद दिलाते हैं, जिसने अंततः तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में शेख हसीना भी बेहद मजबूत और अजेय दिखाई देती थीं, लेकिन समय के साथ हालात बदल गए। स्टीवर्ट का मानना है कि भारत में भी मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
CAA आंदोलन से की तुलना
रोरी स्टीवर्ट ने कहा कि पहले के विरोध प्रदर्शनों, खासकर CAA आंदोलन, को सरकार आसानी से एक खास राजनीतिक या धार्मिक खांचे में रख देती थी। उनके अनुसार, उस समय प्रदर्शनकारियों को वामपंथी या बाहरी फंडिंग से जुड़ा बताकर उनकी आलोचना की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार स्थिति अलग है। उनके मुताबिक, CJP आंदोलन में शामिल लोग अपनी बात नए और रचनात्मक तरीके से रख रहे हैं और प्रदर्शनकारी पहले की तुलना में अधिक मुखर नजर आ रहे हैं।
सरकार पर लगाए आरोप
पॉडकास्ट में रोरी स्टीवर्ट ने भारत सरकार पर भ्रष्टाचार और दमन जैसे आरोप भी लगाए। उनका कहना था कि मीडिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा है और विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। ये टिप्पणियां उनके निजी राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा थीं, जिन पर भारत में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कंवल सिब्बल ने दिया जवाब
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रोरी स्टीवर्ट के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के पूर्व मंत्री को भारत की राजनीतिक परिस्थितियों की पर्याप्त समझ नहीं है और उन्होंने भारत तथा बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था की तुलना बिना तथ्यों के कर दी। कंवल सिब्बल ने कहा कि बांग्लादेश का राजनीतिक इतिहास भारत से पूरी तरह अलग है।
वहां सैन्य शासन, चुनावों का बहिष्कार, राजनीतिक अस्थिरता और अलग तरह की सत्ता संरचना रही है, जबकि भारत एक संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का पतन कई जटिल राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का परिणाम था, जिसकी तुलना भारत से करना उचित नहीं है।
बयान के बाद छिड़ी बहस
रोरी स्टीवर्ट के बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष इसे भारत की राजनीति पर बाहरी टिप्पणी मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल पर एक अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण के रूप में देख रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि CJP आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। वहीं, भारत सरकार की ओर से रोरी स्टीवर्ट की टिप्पणी पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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