ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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फिलीपींस की राजधानी मनीला में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति, व्यापार, ब्रिक्स और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
वांग यी बोले- भारत और चीन एक-दूसरे के साझेदार हैं
बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि अवसर हैं और दोनों को मिलकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। वांग यी के अनुसार, हाल के वर्षों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद फिर से शुरू हो चुका है, सीमा क्षेत्रों में शांति बनी हुई है और व्यापार भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी की बैठकों का किया जिक्र
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी ने कजान और तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकातों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन बैठकों ने भारत-चीन संबंधों को सुधारने और सहयोग बढ़ाने की सही दिशा दिखाई है। उन्होंने दोनों देशों से इस सकारात्मक माहौल को बनाए रखने और आपसी विश्वास को और मजबूत करने की अपील की।
ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ पर सहयोग की बात
वांग यी ने कहा कि भारत और चीन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं। उन्होंने दोनों देशों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दो वर्षों में भारत और चीन बारी-बारी से ब्रिक्स की अध्यक्षता करेंगे। ऐसे में दोनों देशों को संगठन के भीतर बेहतर तालमेल और सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
जयशंकर ने सीमा पर शांति को बताया सबसे पहली शर्त
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंध आपसी सम्मान, आपसी हित और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के सम्मान पर आधारित होने चाहिए। उनका मानना है कि स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे एशिया और विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
व्यापार और आर्थिक मुद्दे भी उठाए
जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष के सामने व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी रखे। उन्होंने भारतीय कंपनियों के लिए चीन के बाजार में मौजूद बाधाओं, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आर्थिक संबंधों को संतुलित और पारदर्शी बनाना दोनों देशों के हित में है।
पूर्वी लद्दाख के बाद धीरे-धीरे सुधर रहे हैं रिश्ते
पूर्वी लद्दाख में 2020 में शुरू हुए लंबे सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव आ गया था। हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुई हैं और सीमा पर स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। मनीला में हुई यह बैठक भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है। दोनों पक्षों ने सीमा से जुड़े तंत्रों को मजबूत करने, संवाद जारी रखने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत और चीन के बीच आने वाले समय में सीमा, व्यापार, ब्रिक्स और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी रहने की संभावना है। फिलहाल दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि मतभेदों के बावजूद संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रखा जाएगा।
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