ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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करीब दो साल पहले सत्ता से हटने और देश छोड़ने के बाद पहली बार बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सार्वजनिक रूप से सामने आईं। उन्होंने भारत में आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया और बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान उनके बेटे और पूर्व सलाहकार सजीब वाजेद जॉय ने भी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है।
शेख हसीना ने आतंकवादियों की रिहाई का लगाया आरोप
नई दिल्ली में आयोजित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया के कार्यक्रम में बोलते हुए शेख हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश में दोषी आतंकवादियों को रिहा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, उनके इन आरोपों पर बांग्लादेश सरकार की ओर से प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
सजीब वाजेद जॉय का बड़ा बयान
शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि देश अब "दूसरा पाकिस्तान" बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है और देश अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। जॉय ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति केवल वहां के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी चिंता का विषय होनी चाहिए।
हिंसा और मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल
सजीब वाजेद जॉय ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और सरकार के आंकड़ों में अंतर है। उनके मुताबिक, मौतों की संख्या को लेकर पारदर्शी जांच की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी हिरासत में मौतों और राजनीतिक हिंसा के मामले सामने आते रहे हैं।
2004 ग्रेनेड हमले का किया जिक्र
कार्यक्रम में पूर्व बांग्लादेशी राजनयिक और खुफिया अधिकारी अमीनुल हक पोलाश ने 21 अगस्त 2004 को हुए ग्रेनेड हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अवामी लीग की रैली पर हुए इस हमले का उद्देश्य शेख हसीना और पार्टी नेतृत्व को निशाना बनाना था। इस हमले में 24 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।
10 ट्रक हथियार बरामदगी मामले का मुद्दा उठाया
अमीनुल हक पोलाश ने 2004 के चटगांव हथियार बरामदगी मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे और जांच में उग्रवादी संगठनों से जुड़े आरोप सामने आए थे। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार यह कहती है कि उग्रवाद का खतरा खत्म हो चुका है, तो इस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।
बांग्लादेश की राजनीति में फिर तेज हुई बहस
शेख हसीना और उनके बेटे के बयानों के बाद बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सत्ता परिवर्तन के बाद देश की सुरक्षा, लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार बहस जारी है। वहीं, भारत के लिए भी बांग्लादेश की स्थिरता महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध जुड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि इन आरोपों पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है।
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