ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रमुख बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्वदेश लौट आए हैं। उनके घर वापसी से बीएनपी समर्थकों में उत्साह का माहौल है और इसे देश की राजनीति में निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक अस्थिरता के बीच वापसी
तारिक रहमान की वापसी ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश गंभीर राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। देश में हिंसक आंदोलन और कट्टरपंथी ताकतों, विशेषकर जमात ए इस्लामी, का प्रभाव बढ़ रहा है। शेख हसीना सरकार ने जमात पर पहले प्रतिबंध लगाया था, लेकिन पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद जमात ने फिर से राजनीति में अपनी जगह बना ली।
भारत के लिए महत्व
भारत के लिए तारिक रहमान की वापसी खास मायने रखती है। प्रो-इंडिया मानी जाने वाली आवामी लीग के चुनाव लड़ने पर रोक है और खालिदा जिया अस्पताल में भर्ती हैं। इस समय बांग्लादेश एक संवेदनशील स्थिति में है, जहाँ भारत विरोधी बयानबाजी और कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है। भारत BNP को अपेक्षाकृत लोकतांत्रिक और उदार विकल्प के रूप में देख रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 दिसंबर को खालिदा जिया के स्वास्थ्य पर चिंता जताई और सहयोग की पेशकश की, जिसे BNP ने सकारात्मक संकेत माना।
चुनावी समीकरण और जमात की चुनौती
हालिया जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, BNP को चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है। लेकिन जमात ए इस्लामी इसे कड़ी चुनौती दे रही है। जमात की छात्र इकाई ने ढाका विश्वविद्यालय में अप्रत्याशित जीत दर्ज की है, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ी हैं।
तारिक रहमान ने यूनुस सरकार के विदेशी नीति निर्णयों पर सवाल उठाए और जमात ए इस्लामी से गठबंधन से इनकार किया। उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति अपनाने का संकेत दिया, जिससे यह साफ है कि BNP न तो पाकिस्तान की नीतियों के करीब जाएगी और न ही भारत के करीब।
घर वापसी का भव्य स्वागत
तारिक रहमान का ढाका आगमन अत्यंत भव्य रहा। एयरपोर्ट से उनके आवास तक रोड शो में लगभग 50 लाख BNP समर्थकों के शामिल होने का दावा किया गया। वे बोगुरा 6 (सदर) सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जबकि खालिदा जिया बोगुरा 7 (गाबटाली शाजहानपुर) से मैदान में उतरेंगी। इस शक्ति प्रदर्शन से कट्टरपंथी तत्व चिंतित हैं और BNP व जमात के बीच संभावित टकराव की आशंका जताई जा रही है।
सरकार ने सुरक्षा के लिए उच्चतम स्तर की व्यवस्था की थी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, रोड शो में तीन लाख लोग 10 विशेष ट्रेनों से राजधानी पहुंचे, जिसे BNP ने 'ऐतिहासिक भीड़' बताया।
तारिक रहमान का राजनीतिक सफर
तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। 2008 से वे लंदन में रह रहे थे। शेख हसीना के शासनकाल में उन पर कई मामले दर्ज हुए थे, जिन्हें BNP ने राजनीतिक साजिश बताया। 2004 के ढाका ग्रेनेड हमले के मामले में उन्हें गैरहाजिरी में सजा सुनाई गई थी। बीते एक वर्ष में अदालतों ने उन्हें सभी बड़े मामलों में बरी कर दिया।
तारिक रहमान की वापसी बीएनपी में नई ऊर्जा ला सकती है और बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। उनके आने से देश में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और भारत के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेत है कि BNP भविष्य में लोकतांत्रिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाए।
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