ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक चले खूनी संघर्ष के बाद मंगलवार सुबह अचानक सीजफायर का ऐलान हुआ।
ये घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की, लेकिन जैसा कि अक्सर होता है, युद्ध की आग तुरंत शांत नहीं हुई।
ट्रंप का बयान आना शुरू होते ही लेबनान की राजधानी बेरूत में युद्ध खत्म नहीं जश्न शुरू हो गया।
बेरूत की सड़कों पर जश्न और पोस्टर
दहीयेह इलाके की सड़कों पर रीढ़ सिकोड़े ईरान समर्थक समूह पोस्टरों से सजा चुके हैं। पोस्टरों में कुछ बड़ी और बोल्ड लाइन लगी है, “ईरान ने इजरायल को धूल चटा दी।”
खामेनेई के सामने ट्रंप को घुटनों पर बैठा दिखाया गया है। ये केवल पोस्टर नहीं, प्रतिरोध की शक्ल है, एक धृष्ट संदेश है कि अमेरिका न केवल युद्ध में पीछे रहेगा बल्कि चेहरा नीचे झुकाएगा।
ये इलाका हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है। यहां किसी राजनितिक गैब नहीं, ये दिल से दिल की बात है, जो ट्रंप को झुकता देखना चाहते हैं, उन्होंने वो कर दिखाया।
सड़कें गूंज रही हैं, नारे फूट रहे हैं, और एक बार फिर ईरान समर्थक माहौल अपना डंका बजा रहा है।
इजरायल की संपत्ति को भारी नुकसान
इस बीच इजरायल के टैक्स अथॉरिटी का खुलासा बताता है कि मौजूदा मिसाइल और ड्रोन अटैक्स से हुई संपत्ति क्षति दस गुना ज़्यादा व्यापक रही, और ये नवंबर 2023 वाले हमलों से भी कहीं आगे निकल गई है।
अब तक 40 हज़ार से ज्यादा आवेदन मुआवजे के लिए आ चुके हैं। इनमें फैक्ट्रियां भी शामिल हैं, जो अभी नुकसान का सही आंकलन कर रही हैं।
सरकार के अनुसार नुकसान की शुरुआती राशि 5 अरब न्यू शेकेल आंकी गई है। करीब 1.47 अरब डॉलर के बराबर की ये राशि बताती है कि मिसाइलें सिर्फ उड़ान भरने वाली खिलौने नहीं थीं, बल्कि जान का हमला थीं।
भारी विस्फोटक वारहेड लगे थे और कहीं अपार्टमेंट जलकर ध्वस्त हो गए, कहीं खिड़कियां टूटकर बिखर गईं या दीवारों पर छर्रों का निशान रह गया।
ईरान का बजता डरना
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी क्षमता दिखा दी, उसने 550 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 1 हज़ार ड्रोन दागे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 31 मिसाइलें आबादी वाले इलाकों में गिरीं, बाकी बच गए या हवा में ही नष्ट कर दिए गए। लेकिन इंटरसेप्टर और मिसाइल तोड़ा-फोड़ा क्षति वही खड़ी कर गया।
इसने दिखाया कि ईरान की मिसाइल स्ट्राइक कितनी सिस्टमिक और स्ट्रेटेजिक हो सकती है। रक्षा मंत्रियों ने इसका श्रेय “पावरफुल वारहेड” और मिसाइलों की सही चालन क्षमता को दिया।
इसने इजराइल की फेमस डिफेंस तंत्र “आयरन डोम” को भी सवालों में घेर दिया, क्योंकि जटिल रक्षा के बावजूद नुकसान हुआ।
ईरानी राष्ट्रपति का जवाब
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बातचीत पर अभी भी भरोसा जाहिर किया और साफ कहा कि उनका देश परमाणु हथियार नहीं चाहता, पर ईरान खुद को “वैध सुरक्षा अधिकार” देगा।
ये अभिव्यक्ति साफगोई थी, कि हम परमाणु ग्राउंड पर नहीं जा रहे, लेकिन हमला मिलने पर जवाब देंगे।
साथ ही उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी दी कि अमेरिका और इजरायल अपनी जबरदस्ती की नीतियां थोपकर ईरान को दबाने का प्रयास करें, तो वो भी इसका हिसाब दे देगा।
ये बयान भारतीय ख़बरों से थोड़ा अलग था, क्योंकि राजनैतिक तौर पर ईरान ने मीडियम चलने दी और टारगेट को समझने की गुंजाइश छोड़ी।
इज़राइल की सेना ने क्या कहा?
इजराइल की सेना ने सार्वजनिक रूप से कहा कि “ईरान ने पिछले एक घंटे में तीन बार मिसाइल हमला किया है।”
इसके बाद सायरन बजे, लोगों को खाली जगह की ओर दौड़ाया गया और बॉम्ब शेल्टर तक पहुंचने के आदेश दिए गए।
ये बयान उस समय आया जब ट्रंप ने सीजफायर बताया था लेकिन हवा में मिसाइलें उछलना नहीं छोड़ा गया। इसके पीछे अमेरिका को खारिज करना था कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ।
लेबनान की प्रतिक्रिया और संकेत
अब सवाल ये उठता है कि लेबनान ने इतनी खामोशी क्यों भंग की? दरअसल यहां अमेरिकी प्रभाव पहले से कमजोर है। ट्रंप का जोर इज़राइल की ओर होता आया है।
मगर बेरूत की सड़कों पर ईरान समर्थक ये संदेश दे रहे हैं कि अब वो ट्रंप की धमकियों से नहीं डरते।
इस विरोधी लहर को अब बाहर से बंद नहीं किया जा सकता। जहां ट्रंप को झुकता हुआ दिखाया गया है, वहां आम जनता की आवाजाही भी लगातार तेज होती जा रही है। इसका असर भविष्य में मध्य पूर्व पॉलिटिक्स पर भी गहरा होगा।
आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।
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