ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका को लंबे समय से ऐसे देश के रूप में देखा जाता है, जहां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन हाल के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि धार्मिक और नस्ली अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत और भेदभाव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी FBI ने 2025 के हेट क्राइम से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कुल रिपोर्ट किए गए हेट क्राइम में कमी आई है। हालांकि, हिंदू समुदाय को निशाना बनाने वाले मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सिख समुदाय को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
अमेरिका में कुल हेट क्राइम में आई कमी
FBI के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में देशभर में 10,881 हेट क्राइम घटनाएं रिपोर्ट की गईं। वहीं, 2024 में यह संख्या 11,679 थी। हालांकि, दोनों वर्षों की तुलना के लिए FBI के तुलनात्मक राष्ट्रीय डेटाबेस को देखना ज्यादा उचित माना जाता है। इस तुलनात्मक आंकड़े के अनुसार 2024 में 11,404 और 2025 में 10,606 घटनाएं दर्ज हुईं। यानी राष्ट्रीय स्तर पर करीब 7 फीसदी की कमी देखने को मिली। लेकिन धार्मिक समुदायों की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
हिंदू विरोधी मामलों में बढ़ोतरी
उपलब्ध 2025 FBI डेटा के विश्लेषण के मुताबिक, हिंदू समुदाय के खिलाफ नफरत से जुड़े मामले 2024 के 25 से बढ़कर 2025 में 28 हो गए। सिख समुदाय के खिलाफ हेट क्राइम को लेकर अलग-अलग विश्लेषणों में अलग आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि, अमेरिका में सिख समुदाय लंबे समय से नस्ली और धार्मिक भेदभाव की समस्या का सामना करता रहा है। यह भी समझना जरूरी है कि FBI के आंकड़े पुलिस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा रिपोर्ट किए गए मामलों पर आधारित होते हैं। हर घटना पुलिस तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ रही नफरत
नफरत सिर्फ सड़क या सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के 2026 इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड सर्वे के मुताबिक, करीब 48 फीसदी भारतीय-अमेरिकियों ने कहा कि उन्होंने 2025 की शुरुआत से भारतीयों या भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नस्ली टिप्पणियां सोशल मीडिया पर अक्सर या कुछ हद तक देखी हैं।सर्वे में करीब एक चौथाई लोगों ने जातीय गाली सुनने की बात कही। कुछ लोगों ने शारीरिक धमकी, हेट मेल, संपत्ति को नुकसान और शारीरिक हमले का अनुभव भी बताया।
हेट स्पीच और हेट क्राइम में फर्क जरूरी
किसी व्यक्ति का आपत्तिजनक बयान अपने आप हेट क्राइम नहीं बन जाता। अमेरिकी कानून में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक व्यवहार के बीच अंतर किया जाता है। अगर किसी बयान में हिंसा की धमकी, हिंसा के लिए उकसावा या कोई अन्य आपराधिक तत्व शामिल हो, तो मामला अलग हो सकता है। इसलिए हेट स्पीच, हेट इंसिडेंट और हेट क्राइम को एक ही चीज मानना सही नहीं है।
अल्पसंख्यकों के लिए हैं कई कानूनी सुरक्षा
अमेरिका में धार्मिक और नस्ली अल्पसंख्यकों को कई कानूनों के तहत सुरक्षा मिलती है। 1964 का Civil Rights Act रोजगार, सार्वजनिक स्थानों और संघीय सहायता पाने वाले कार्यक्रमों में भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा देता है। इसके अलावा Voting Rights Act, Fair Housing Act और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कानून भी अलग-अलग परिस्थितियों में लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
FBI हेट क्राइम से जुड़े मामलों की जांच और आंकड़े जुटाने में भूमिका निभाती है, जबकि अमेरिकी न्याय विभाग संघीय नागरिक अधिकार और हेट क्राइम कानूनों को लागू करता है। रोजगार से जुड़े भेदभाव के मामलों में EEOC भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
FBI का डेटा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता
विशेषज्ञों के मुताबिक, FBI के आंकड़े नफरत की पूरी तस्वीर नहीं बताते। कई पीड़ित पुलिस में शिकायत नहीं करते। कुछ लोग डर या जानकारी की कमी के कारण मामला दर्ज नहीं कराते। इसके अलावा सोशल मीडिया पर होने वाली गाली-गलौज और नफरत भरी टिप्पणियां भी हमेशा पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनतीं। इसलिए कुल हेट क्राइम में कमी एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन हिंदू और सिख समुदायों से जुड़े आंकड़े यह सवाल भी उठाते हैं कि अमेरिका में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत को रोकने के लिए अभी और कितने प्रयास की जरूरत है।
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