ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका ने इराक में अपनी बची हुई सैन्य मौजूदगी से जुड़े सैनिकों और ठिकानों की वापसी पूरी कर ली है। इसके साथ 2003 में शुरू हुआ अमेरिकी सैन्य अभियान का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया। अमेरिका और इराक के बीच 2024 में इस वापसी को लेकर समयसीमा तय की गई थी, जिसे अब लागू किया गया है।
2003 से शुरू हुआ था सफर
इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की शुरुआत 2003 में हुई थी। उस समय अमेरिका के नेतृत्व में सैन्य कार्रवाई के बाद वहां बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा बदलाव आया। इसके बाद कई वर्षों तक अमेरिकी सैनिक इराक में मौजूद रहे। समय के साथ अमेरिकी सैन्य भूमिका बदलती गई। शुरुआत में जहां बड़े स्तर पर सैन्य अभियान था, वहीं बाद के वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और इराकी सुरक्षा बलों को मदद देना अहम हिस्सा बन गया। अब अमेरिकी सैनिकों की बची हुई सैन्य मौजूदगी भी समाप्त हो गई है।
इराक के लिए क्या मायने रखता है?
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल इराक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। देश में पहले से कई तरह के सुरक्षा समूह और राजनीतिक ताकतें सक्रिय रही हैं। खास चिंता ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों और ISIS जैसी आतंकी गतिविधियों को लेकर बताई जा रही है। अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म होने के बाद इराक को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य क्षमता पर ज्यादा निर्भर रहना होगा।
ईरान का प्रभाव भी चर्चा में
अमेरिकी सैनिकों की वापसी को ईरान और उसके सहयोगी गुट अपनी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इराक मध्य पूर्व की राजनीति में ईरान और अमेरिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण देश रहा है। इराक की भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है। एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र। ऐसे में इराक की घरेलू राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
अमेरिका की नीति में बदलाव
अमेरिका की इराक नीति पिछले दो दशकों में कई बार बदली है। बड़े सैन्य अभियान से लेकर आतंकवाद विरोधी सहयोग तक इसकी भूमिका अलग-अलग चरणों में रही। अब पूरी सैन्य वापसी के बाद दोनों देशों के संबंध किस रूप में आगे बढ़ते हैं, यह देखने वाली बात होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका और इराक के संबंध पूरी तरह खत्म हो गए हैं। सैन्य मौजूदगी और व्यापक राजनयिक या आर्थिक संबंध अलग-अलग चीजें हैं।
आगे की चुनौती
इराक के सामने अब अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने की चुनौती है। ISIS की गतिविधियों, स्थानीय सशस्त्र समूहों और क्षेत्रीय तनाव के बीच सरकार को संतुलन बनाना होगा। दूसरी तरफ अमेरिका के लिए भी सवाल यह रहेगा कि इराक से सैन्य वापसी के बाद वह पूरे मध्य पूर्व में अपनी रणनीति को कैसे आगे बढ़ाता है। 23 साल बाद अमेरिकी सैन्य अध्याय का यह चरण खत्म हुआ है, लेकिन मध्य पूर्व की राजनीति में इसके असर पर चर्चा अभी जारी रहेगी।
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