ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस का साउथ लॉन इन दिनों एक नए हेलीपैड को लेकर चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को व्हाइट हाउस परिसर का दौरा कराया और इस दौरान नया हेलीपैड भी दिखाया।
यह हेलीपैड अपनी डिजाइन, काले ग्रेनाइट और अनुमानित लागत के कारण चर्चा में आया है।
100 फीट चौड़ा हेलीपैड
जानकारी के अनुसार नया हेलीपैड करीब 100 फीट चौड़ा है। इसे काले ग्रेनाइट से बनाया गया है। इसके बीच में अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक प्रतीक भी लगाया गया है।
इस डिजाइन से साफ है कि इसे केवल एक सामान्य लैंडिंग जगह के रूप में नहीं देखा गया। व्हाइट हाउस जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक परिसर में किसी भी नए निर्माण की अपनी खास अहमियत होती है।
लागत करीब 50 करोड़ रुपये
इस हेलीपैड की अनुमानित लागत 5 से 6 मिलियन डॉलर बताई गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 50 करोड़ रुपये बैठती है।
हालांकि यह अनुमानित लागत है और किसी परियोजना की अंतिम लागत इससे अलग हो सकती है। फिर भी इतनी बड़ी राशि होने के कारण यह हेलीपैड लोगों की चर्चा का विषय बन गया।
शी जिनपिंग को दिखाया गया Marine One
दौरे के दौरान ट्रंप ने शी जिनपिंग को Marine One भी दिखाया। Marine One अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक हेलीकॉप्टर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है।
राष्ट्रपति की सुरक्षा और आधिकारिक यात्रा के लिहाज से यह हेलीकॉप्टर काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए विदेशी नेता को इसका दौरा कराना भी एक खास कार्यक्रम माना जाता है।
B-2 बॉम्बर भी रहा चर्चा में
इस पूरे कार्यक्रम में अमेरिकी सैन्य शक्ति की झलक भी दिखाई गई। B-2 बॉम्बर अमेरिकी वायुसेना का स्टील्थ विमान है।
एक विदेशी नेता की यात्रा के दौरान अमेरिकी सैन्य क्षमता की ऐसी झलक कूटनीतिक दृष्टि से भी ध्यान खींचती है। हालांकि किसी भी सैन्य प्रदर्शन के पीछे आधिकारिक कार्यक्रम और सुरक्षा कारण भी हो सकते हैं।
अमेरिका-चीन संबंधों के बीच मुलाकात
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव को लेकर लंबे समय से कई मुद्दे हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती है।
व्हाइट हाउस का दौरा, Marine One और सैन्य विमान की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और ज्यादा ध्यान खींचने वाला बना दिया।
सिर्फ हेलीपैड की कहानी नहीं
यह खबर सिर्फ एक नए हेलीपैड के निर्माण की नहीं है। इसके पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा, आधिकारिक प्रोटोकॉल और अमेरिका-चीन संबंध जैसे कई पहलू जुड़े हैं।
यही कारण है कि एक हेलीकॉप्टर लैंडिंग साइट की खबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के बीच भी चर्चा में आ गई है।
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