ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद के मोदीनगर थाना क्षेत्र के गोविंदपुरम में अक्टूबर 2023 में हुई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को हिला दिया था। 11 वर्षीय बेटे शब्द उर्फ़ सद्दी की सौतेली मां रेखा और उसकी सहेली पूनम ने मिलकर हत्या कर दी थी। मंगलवार को अदालत ने दोनों को आजीन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अगर जुर्माना अदा नहीं किया गया तो अतिरिक्त एक वर्ष का कारावास भुगतना होगा।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और घटना का खुलासा
गोविंदपुरम के डबल स्टोरी कालोनी में रहने वाले राहुल की दूसरी शादी रेखा से हुई थी। रेखा की पहली शादी से एक डेढ़ वर्षीय बेटी परी थी, जबकि राहुल का पहला विवाह 11 वर्षीय बेटे शब्द के साथ हुआ। कुछ समय राहुल नोएडा में रहे, लेकिन शादी के बाद वे परिवार के साथ गोविंदपुरम रहने लगे। एक दिन अचानक शब्द घर से लापता हो गया। राहुल ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
सीसीटीवी फुटेज से मिली सच्चाई
पुलिस ने घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले। कैमरे में शब्द मकान के अंदर जाता दिखा, लेकिन बाहर निकलता नहीं दिखा। इस पर पुलिस ने घर में तलाश शुरू की।
पुलिस ने देखा कि सेप्टिक टैंक का स्लैब टूटा हुआ था और उस पर लकड़ी का फट्टा रखा गया था। जांच में पुलिस ने टैंक में शव पाया। शव बाहर निकालने पर पता चला कि वह शब्द का ही था। शव के दाहिने पैर में पत्थर से चुन्नी बंधी थी और गले पर चोट के निशान थे।
रेखा का बयान और हत्या की वजह
पुलिस ने रेखा से पूछताछ की। शुरुआती बयान बदलने के बाद रेखा ने अपना जुर्म कबूल किया। उसने बताया कि शब्द के बर्ताव और भविष्य को लेकर उसे चिंता थी। उसे लगता था कि शब्द भविष्य में अपने पास नहीं रखेगा और उसकी बेटी को भाई जैसा प्रेम नहीं मिलेगा। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में साक्ष्य और सबूत पेश किए।
पूनम की भूमिका और साजिश
पूलनम रेखा की सहेली थी और हत्या में उसकी मददगार साबित हुई। पुलिस की जांच में सामने आया कि दोनों ने टीवी पर देखी क्राइम सीरियल से प्रेरणा लेकर हत्या की योजना बनाई। हालांकि रेखा ने इसे कोर्ट में सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया।
अदालत का फैसला
अपर जिला न्यायाधीश विनोद कुमार ने मंगलवार को दोनों महिलाओं को हत्या का दोषी मानते हुए आजीन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा साक्ष्य छुपाने के लिए तीन-तीन साल का कारावास और 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
अभियोजन और पुलिस की भूमिका
अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता ममता गौतम ने केस की मजबूती से पैरवी की। निजी अधिवक्ता राहुल कुमार कोको और नसीम चौधरी ने निशुल्क पैरवी की। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ कर साजिश का पर्दाफाश किया और न्याय सुनिश्चित किया।
यह मामला एक परिवारिक त्रासदी और सोची-समझी साजिश का उदाहरण है। अदालत ने दोषियों को सजा देकर न्याय की मिसाल पेश की। घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवारिक तनाव और असंवेदनशील व्यवहार बच्चों के लिए कितने घातक साबित हो सकते हैं। इस सजा से समाज में संदेश गया कि बच्चों की सुरक्षा और न्याय सर्वोपरि है, और कोई भी अपराध कानून की नजर से बच नहीं सकता।
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