ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद में सोमवार की सुबह कोहरे ने पूरे शहर को ढक लिया। गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घरों से कम ही बाहर निकले हैं। न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 31 दिसंबर तक इसी तरह का मौसम बना रह सकता है, जबकि 1 जनवरी से ठंड और बढ़ने की संभावना है।
कोहरे और ठंड से प्रभावित दैनिक जीवन
सुबह-सुबह कोहरे और ठंड की वजह से लोग घरों में ही सुरक्षित रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। गलियों और सड़कों पर कम भीड़ है और वाहनों की गति भी धीमी है। हवा की गति 6 किमी प्रति घंटा रह गई है, जिससे धूल और प्रदूषण फैलने की संभावना कम हो रही है।
हालांकि, इस मौसम ने स्वास्थ्य के लिहाज से खतरा बढ़ा दिया है। Commission for Air Quality Management (CAQM) ने गाजियाबाद में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-4 तुरंत लागू कर दिया है। इसके तहत हवा की गुणवत्ता बेहद खराब मानी जा रही है और दृश्यता में भी भारी कमी आई है।
हवा में बढ़ा जहर, स्वास्थ्य पर गंभीर असर
गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 पार कर गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इससे विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं वाले मरीजों के लिए गंभीर खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने सभी नागरिकों से कहा है कि वे घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाएं।
स्कूलों में अवकाश का आदेश
गाजियाबाद के डीएम रविंद्र मांदड़ के निर्देश पर कक्षा एक से 12वीं तक के सभी स्कूलों में ठंड और प्रदूषण के कारण अवकाश घोषित कर दिया गया है। यह आदेश सरकारी, CBSE, ICSE और सभी प्रकार के बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा। डीआईओएस ने स्पष्ट किया कि अगर कहीं भी स्कूल खुले पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, कक्षा एक से 8 तक के सरकारी स्कूलों में भी अवकाश रहेगा। सरकारी स्कूल अब 15 जनवरी 2026 को खुलेंगे। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को ठंड और प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम से बचाना है।
GRAP-4 लागू, सख्त प्रतिबंध
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) स्टेज-4 लागू होने के साथ ही गाजियाबाद में कई सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
इस योजना के तहत सड़क निर्माण, ढुलाई और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल वाहनों की संख्या और उद्योगों की गतिविधियों की निगरानी बढ़ाई जाती है।
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