ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP को लेकर नया विवाद सामने आया है। करीब 140 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट पर नगर पालिका के कुछ सभासदों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब कई इलाकों में सीवर लाइन ही नहीं बिछी है तो STP का पूरा फायदा लोगों तक कैसे पहुंचेगा। इस वजह से योजना के इस्तेमाल और खर्च को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सीवर लाइन नहीं तो पानी पहुंचेगा कैसे?
सभासदों का तर्क है कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तभी प्रभावी तरीके से काम कर सकता है जब घरों और इलाकों से निकलने वाला सीवेज सही नेटवर्क के जरिए प्लांट तक पहुंचे। खोड़ा की कई संकरी गलियों में सीवर लाइन बिछाना मुश्किल बताया जाता है। कई जगह लोगों ने अपने स्तर पर सीवर टैंक बना रखे हैं। इन टैंकों का पानी ओवरफ्लो होने के बाद नालियों में जाने की बात सामने आई है। बरसात के समय यही गंदा पानी सड़कों पर जमा होने से स्थानीय लोगों को परेशानी होती है।
नगर पालिका का क्या कहना है?
नगर पालिका की तरफ से कहा गया है कि फिलहाल नालियों और नालों को STP से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि शुरुआत में नालों के जरिए आने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने की कोशिश की जाएगी। नगर पालिका अध्यक्ष के अनुसार STP का निर्माण NGT के आदेश के आधार पर किया जा रहा है और इसे नालों से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। आगे की योजना में सीवर लाइन बिछाने की बात भी कही गई है।
NGT की कार्रवाई का भी संदर्भ
खोड़ा से निकलने वाला सीवेज दिल्ली और नोएडा की तरफ जाने वाले नालों के जरिए यमुना तक पहुंचने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। इस मामले में NGT की ओर से नगर पालिका पर जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में STP का उद्देश्य गंदे पानी को सीधे नदियों और नालों में जाने से रोकना है।
असली चुनौती कनेक्टिविटी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल STP की क्षमता से ज्यादा उसके connectivity network का है। अगर सीवर लाइन का नेटवर्क कमजोर रहा तो प्लांट की क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। वहीं नगर पालिका का कहना है कि नालों के पानी को STP तक पहुंचाकर भी काफी मात्रा में सीवेज ट्रीट किया जा सकता है।
अब आने वाले समय में यह देखना होगा कि STP के साथ सीवर और नालों की कनेक्टिविटी कितनी प्रभावी बनती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पहले सभी वार्डों में सीवर लाइन बिछाकर उन्हें मुख्य नेटवर्क से जोड़ा जाए। फिलहाल यह मामला स्थानीय विकास योजना, सीवेज मैनेजमेंट और सरकारी खर्च—तीनों से जुड़ा हुआ है। STP तैयार होने के बाद उसका वास्तविक फायदा तभी साफ होगा जब गंदे पानी को व्यवस्थित तरीके से प्लांट तक पहुंचाया जा सके।
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