ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद के वेव सिटी इलाके से कथित निवेश धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान हुई पहचान के बाद उन्हें राजस्थान की राइस मिल से जुड़े कारोबार में निवेश करने के लिए तैयार किया गया। शिकायत के मुताबिक करीब 1.10 करोड़ रुपये अलग-अलग माध्यमों से दिए गए, लेकिन बाद में न तो मूल रकम वापस मिली और न ही कथित मुनाफा। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इलाज के दौरान हुई पहचान
शिकायतकर्ता तस्लीम के अनुसार इलाज के दौरान उनकी पहचान डॉक्टर इरशाद से हुई। बाद में कथित तौर पर अमित कुमार और वैशाली मित्तल नाम के लोगों से भी संपर्क हुआ। आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें राजस्थान में राइस मिल से जुड़े कारोबार में निवेश करने और ज्यादा मुनाफा कमाने का भरोसा दिया गया।
निवेश का वादा
शिकायत के मुताबिक कारोबार में चावल, लकड़ी और चीनी जैसे उत्पादों से जुड़े मुनाफे की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के आधार पर एक अनुबंध भी किया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अलग-अलग समय पर पैसे ट्रांसफर किए। बताया गया है कि शुरुआत में 8 लाख रुपये एक आरोपी के खाते में भेजे गए, जबकि 15 लाख रुपये हाजी तैयब के माध्यम से अमित कुमार तक पहुंचाए गए।
1.10 करोड़ रुपये देने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि करीब एक साल की अवधि में कुल 1.10 करोड़ रुपये दिए गए। इसके बाद जब निवेश की रकम और मुनाफे की मांग की गई तो कथित तौर पर पैसा वापस नहीं किया गया। बुजुर्ग के अनुसार उन्हें कारोबार से मिलने वाले लाभ का भरोसा दिया गया था, लेकिन रकम वापस न मिलने के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
एफआईआर के बाद जांच
20 सितंबर को मामले में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच में बैंक लेनदेन, अनुबंध, कॉल रिकॉर्ड और आरोपियों तथा शिकायतकर्ता के बीच हुए संपर्क जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड आरोपों की पुष्टि करते हैं, तो जांच आगे बढ़ सकती है।
आरोपों की पुष्टि जांच के बाद
यह मामला फिलहाल शिकायत और एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए दावों की न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रकम किस तरह ली गई, कारोबार का प्रस्ताव वास्तविक था या नहीं और पैसों का इस्तेमाल कहां किया गया।
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