ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मुख्य चुनाव आयुक्त के पद को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बहस तेज हुई है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे दें तो चुनाव आयोग का काम कैसे चलेगा। कानूनी व्यवस्था के अनुसार CEC के इस्तीफे से चुनाव आयोग का काम बंद नहीं होता। आयोग में मौजूद दूसरे चुनाव आयुक्त अपने संवैधानिक काम जारी रख सकते हैं।
इस्तीफा किसे दिया जाता है?
2023 के कानून की धारा 11 के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त या कोई अन्य चुनाव आयुक्त अगर अपने पद से इस्तीफा देना चाहता है तो उसे राष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र देना होता है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद पद खाली माना जाता है। यानी सिर्फ इस्तीफे की घोषणा से प्रक्रिया पूरी नहीं होती, बल्कि निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पद खाली होता है।
बाकी चुनाव आयुक्त संभाल सकते हैं काम
भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने, मतदाता सूची और चुनावी निगरानी जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा अन्य चुनाव आयुक्त भी होते हैं। इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त काम कर रहे हैं। ऐसे में अगर CEC का पद खाली होता है तो आयोग की पूरी व्यवस्था खत्म नहीं हो जाती। बाकी आयुक्त आयोग का काम जारी रख सकते हैं।
क्या वरिष्ठ आयुक्त अपने आप CEC बन जाते हैं?
यह भी एक आम सवाल है कि अगर CEC का पद खाली हो जाए तो क्या सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त बन जाता है। मौजूदा कानूनी व्यवस्था में ऐसा कोई स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं बताया गया है। अनुच्छेद 324(2) के तहत राष्ट्रपति के पास मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का अधिकार है। इसलिए खाली पद पर नया CEC नियुक्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
चुनाव आयोग की व्यवस्था कैसे चलती है?
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसका काम किसी एक व्यक्ति के पद पर निर्भर नहीं रहता। CEC आयोग के अध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं, लेकिन आयोग में बाकी आयुक्त भी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए किसी CEC के इस्तीफे की स्थिति में चुनाव आयोग की पूरी व्यवस्था रुक नहीं जाती। नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त होने तक निर्धारित व्यवस्था के तहत आयोग काम करता रहता है। यही वजह है कि CEC के इस्तीफे की स्थिति को समझते समय व्यक्ति के पद से ज्यादा आयोग की संवैधानिक संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
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