ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत में एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। E20 ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है। हालांकि, E20 पेट्रोल के बढ़ते उपयोग के साथ इसकी शेल्फ लाइफ और लंबे समय तक सुरक्षित स्टोर करने को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य पेट्रोल की तुलना में E20 पेट्रोल अधिक संवेदनशील होता है। यदि इसे सही तरीके से स्टोर नहीं किया जाए, तो इसकी गुणवत्ता जल्दी खराब हो सकती है, जिससे वाहन के इंजन की कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
E20 पेट्रोल की शेल्फ लाइफ कितनी होती है?
सामान्य परिस्थितियों में साधारण पेट्रोल को लगभग 3 से 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके विपरीत, E20 पेट्रोल की शेल्फ लाइफ आमतौर पर 30 से 90 दिनों के बीच मानी जाती है। इसके बाद ईंधन की गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है और इसका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह E20 में मौजूद एथेनॉल है, जो सामान्य पेट्रोल की तुलना में अलग तरीके से व्यवहार करता है और लंबे समय तक स्टोर रहने पर ईंधन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
एथेनॉल E20 पेट्रोल के लिए चुनौती क्यों बनता है?
E20 पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल हाइग्रोस्कोपिक (Hygroscopic) होता है। इसका अर्थ है कि यह आसपास की हवा से नमी को आसानी से सोख लेता है। जब ईंधन में नमी बढ़ने लगती है, तब फेज सेपरेशन (Phase Separation) की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस प्रक्रिया में एथेनॉल और पानी आपस में मिलकर फ्यूल टैंक के निचले हिस्से में जमा हो जाते हैं, जबकि पेट्रोल ऊपर अलग परत के रूप में रह जाता है। इस स्थिति में पेट्रोल की गुणवत्ता और उसकी कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो जाती हैं, जिससे इंजन के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
फेज सेपरेशन इंजन को कैसे प्रभावित करता है?
फेज सेपरेशन होने के बाद बचा हुआ पेट्रोल अपनी ऑक्टेन क्षमता का कुछ हिस्सा खो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी ऑक्टेन रेटिंग 3 से 4 अंक तक कम हो सकती है। यदि टैंक के निचले हिस्से में जमा पानी और एथेनॉल का मिश्रण इंजन तक पहुंच जाता है, तो वाहन को स्टार्ट करने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा इंजन की परफॉर्मेंस कम हो सकती है, मिसफायरिंग या नॉकिंग जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं और लंबे समय में मैकेनिकल खराबी का खतरा भी बढ़ सकता है।
E20 पेट्रोल से और कौन-सी समस्याएं हो सकती हैं?
एथेनॉल केवल नमी ही नहीं सोखता, बल्कि यह ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया को भी तेज कर देता है। इसके कारण चिपचिपा पदार्थ (गम डिपॉजिट) बनने लगता है, जो फ्यूल इंजेक्टर और कार्बोरेटर को जाम कर सकता है। इसके अलावा, अधिक नमी के कारण फ्यूल सिस्टम में मौजूद स्टील, एल्युमिनियम और पीतल जैसे धातु के हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है। पुरानी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का लंबे समय तक उपयोग रबर होज, सील और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स को तेजी से खराब कर सकता है। इससे समय के साथ फ्यूल लीकेज जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
E20 पेट्रोल को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?
यदि E20 पेट्रोल को लंबे समय तक स्टोर करना जरूरी हो, तो कुछ सावधानियां अपनाकर इसकी गुणवत्ता को बनाए रखा जा सकता है। यदि ईंधन को 30 दिनों से अधिक समय तक स्टोर करना हो, तो अच्छी गुणवत्ता वाले फ्यूल स्टेबलाइजर का उपयोग करना चाहिए। इससे ईंधन की उपयोग अवधि लगभग 6 महीने तक बढ़ाई जा सकती है। ईंधन को हमेशा पूरी तरह बंद और एयरटाइट धातु के कंटेनर में रखना चाहिए, ताकि उसमें नमी प्रवेश न कर सके।
यदि वाहन लंबे समय तक उपयोग में नहीं आने वाला है, तो उसके फ्यूल टैंक को लगभग पूरा भरा रखना बेहतर माना जाता है। इससे टैंक के अंदर हवा की मात्रा कम रहती है और नमी बनने की संभावना भी घट जाती है। यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहा हो, तो उसे दोबारा स्टार्ट करने से पहले टैंक में उसकी क्षमता के कम से कम एक-तिहाई हिस्से के बराबर ताजा पेट्रोल डालना चाहिए। इससे पुराने ईंधन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और इंजन बेहतर तरीके से काम करता है।
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