ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय तक प्रॉपर्टी की बात आते ही लोगों के मन में सबसे पहले गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली का नाम आता था। लेकिन अब रियल एस्टेट का नक्शा तेजी से बदल रहा है। केंद्र और दिल्ली सरकार की नई इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के साथ अब उन इलाकों पर भी निवेशकों की नजर है, जिन्हें अब तक विकास की दौड़ में पीछे माना जाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों के पास इन क्षेत्रों में खेत या जमीन है, उन्हें जल्दबाजी में उसे बेचने से पहले भविष्य की संभावनाओं पर जरूर विचार करना चाहिए।
24,800 करोड़ रुपये के सात बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, केंद्र और दिल्ली सरकार मिलकर करीब 24,800 करोड़ रुपये की लागत से सात बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही हैं। इन परियोजनाओं के तहत नए एक्सप्रेसवे, सुरंगें (टनल), एलिवेटेड कॉरिडोर और आधुनिक कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली में ट्रैफिक का दबाव कम करना और पूरे एनसीआर को बेहतर सड़क एवं परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है। इन परियोजनाओं का फायदा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के कई शहरों और कस्बों को भी मिलेगा।
NCR Regional Plan-2041 से बदल सकती है तस्वीर
रियल एस्टेट सलाहकार संस्था नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, NCR Regional Plan-2041 के तहत करीब 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है। इस योजना का बड़ा हिस्सा पहले से विकसित शहरों की बजाय उन नए इलाकों में लगाया जाएगा, जहां अभी पर्याप्त जमीन उपलब्ध है और विकास की संभावनाएं ज्यादा हैं। बेहतर सड़कें, औद्योगिक विकास और नई कनेक्टिविटी भविष्य में इन क्षेत्रों की प्रॉपर्टी वैल्यू को प्रभावित कर सकती हैं।
इन इलाकों पर रहेगी निवेशकों की नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक विकास की संभावना मानी जा रही है, उनमें शामिल हैं—
• द्वारका एक्सप्रेसवे
• यमुना एक्सप्रेसवे
• न्यू गुरुग्राम
• सोहना
• ग्रेटर नोएडा
• ग्रेटर फरीदाबाद
• सोनीपत-कुंडली बेल्ट
• राज नगर एक्सटेंशन
इन इलाकों में नई सड़कें, औद्योगिक परियोजनाएं और बेहतर कनेक्टिविटी भविष्य में प्रॉपर्टी की मांग बढ़ा सकती हैं।
नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर देगा नई रफ्तार
गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर भी इस बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। करीब 64 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक शुरू करने और वर्ष 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत बाटा चौक जैसे इंटरचेंज क्षेत्रों के आसपास नए आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना है।
जमीन बेचने से पहले करें पूरी पड़ताल
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं, वहां भविष्य में जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना हो सकती है। हालांकि, किसी भी निवेश या जमीन बेचने का फैसला लेने से पहले संबंधित क्षेत्र की सरकारी योजनाओं, मास्टर प्लान, भूमि उपयोग (Land Use) और स्थानीय नियमों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
यदि किसी क्षेत्र में नई सड़क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो या आरआरटीएस जैसी परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो वहां की प्रॉपर्टी का मूल्य आने वाले वर्षों में बेहतर हो सकता है। इसलिए जल्दबाजी में जमीन बेचने के बजाय पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह के साथ निर्णय लेना अधिक समझदारी होगी।
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