ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नेपाल के रसुवा जिले में आई अचानक फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और भारत भी नेपाल की मदद के लिए आगे आया है। शुरुआत में इस आपदा के पीछे भूकंप को संभावित कारण माना जा रहा था, लेकिन बाद में सामने आए सैटेलाइट विश्लेषण ने पूरी तस्वीर को एक नया मोड़ दिया। अब विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरने से पैदा हुए आइस-रॉक एवलॉन्च ने इस विनाशकारी बाढ़ को जन्म दिया हो सकता है।
5,200 मीटर की ऊंचाई से टूटा ग्लेशियर
सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा अचानक टूट गया। इसके बाद बर्फ का विशाल हिस्सा लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी की ओर जा गिरा। इतनी ऊंचाई से बर्फ और चट्टानों के गिरने के दौरान अपने साथ भारी मात्रा में मलबा भी नीचे आया। बर्फ, चट्टान, मिट्टी और बोल्डर के इस तेज बहाव ने नदी के जलस्तर को अचानक बढ़ा दिया। इसके बाद जो स्थिति बनी, उसने फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया।
पहले भूकंप को माना गया था वजह
26 अगस्त को हुई इस घटना के बाद शुरुआती जानकारी में भूकंप को संभावित ट्रिगर माना गया था। हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के विश्लेषण के बाद इस संभावना पर सवाल उठे। विशेषज्ञों के अनुसार, जिस भूकंपीय गतिविधि को शुरुआत में भूकंप समझा गया था, वह ग्लेशियर, चट्टानों और बर्फ के अचानक टूटकर नीचे गिरने से पैदा हुई सेसिमिक एनर्जी भी हो सकती है। नेपाल के भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों ने भी कहा है कि फिलहाल घटना की पूरी वजह स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच जारी है।
क्या होता है ग्लेशियर कॉलैप्स?
ग्लेशियर पहाड़ों पर जमा बर्फ की विशाल परत होती है, जो धीरे-धीरे नीचे की तरफ खिसकती रहती है। तापमान बढ़ने, बर्फ तेजी से पिघलने, बारिश, चट्टानों के कमजोर होने या भूकंपीय गतिविधि जैसी परिस्थितियों में ग्लेशियर का कोई हिस्सा अस्थिर हो सकता है। जब यह हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरता है तो अपने साथ चट्टान, मिट्टी और बर्फ को भी बहा ले जाता है। इससे बेहद तेज गति वाला आइस-रॉक एवलॉन्च बन सकता है। नेपाल में भी इसी तरह की प्रक्रिया होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन भी एक संभावित कारण
सिक्किम यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग जियोलॉजी विशेषज्ञ विक्रम गुप्ता के अनुसार, उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर के निचले हिस्से के टूटने के संकेत दिखाई देते हैं। इस दौरान बड़ी मात्रा में चट्टान भी बहाव में शामिल हुई। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी के अर्थ साइंटिस्ट डैन शुगर ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर हादसे से पहले बर्फ के तेजी से पिघलने के संकेत मिलने की बात कही है। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और इलाके में निर्माण गतिविधियों को भी संभावित कारकों में शामिल किया है। हालांकि, किसी एक कारण को अभी अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
क्या यह GLOF था?
इस घटना को लेकर एक सवाल यह भी है कि क्या यह Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF हो सकता है। GLOF में ग्लेशियर के पास बनी झील का प्राकृतिक बांध टूट जाता है और अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है। हालांकि, अभी तक उपलब्ध सैटेलाइट विश्लेषण में घटना को सीधे GLOF की बजाय ग्लेशियर कॉलैप्स और आइस-रॉक एवलॉन्च से जुड़ी फ्लैश फ्लड माना जा रहा है। अंतिम निष्कर्ष के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।
भारत ने जारी की हेल्पलाइन
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की खबरों के बीच भारत सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बात कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। वहीं नेपाल पर्यटन बोर्ड की ओर से भी आपातकालीन सहायता के लिए 1234 और 1144 जैसे नंबर जारी किए गए हैं। फिलहाल नेपाल में सेना, पुलिस और बचाव दल प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के तेजी से बदलते स्वरूप और अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है।
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