ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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आजकल बिजली का बिल कम करने के लिए लोग घर की छत पर रूफटॉप सोलर लगवा रहे हैं। लेकिन सोलर लगवाने के बाद सबसे ज्यादा सवाल बिजली के मीटर को लेकर होता है। क्या पुराना मीटर चलता रहेगा या नया मीटर लगाना पड़ेगा? अगर आपका सोलर सिस्टम ग्रिड से जुड़ा हुआ है और आप अतिरिक्त बिजली वापस ग्रिड में भेजना चाहते हैं, तो नेट मीटरिंग की जरूरत पड़ती है। इसमें सामान्य मीटर की जगह बाई-डायरेक्शनल यानी दो तरफ से बिजली का हिसाब रखने वाला मीटर लगाया जाता है।
नेट मीटर क्या करता है?
सामान्य बिजली मीटर यह रिकॉर्ड करता है कि आपने बिजली कंपनी के ग्रिड से कितनी बिजली इस्तेमाल की। लेकिन सोलर सिस्टम लगने के बाद स्थिति थोड़ी अलग होती है। दिन में सोलर पैनल जरूरत से ज्यादा बिजली बना सकते हैं। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में वापस जा सकती है। नेट मीटर दोनों दिशाओं में बिजली का हिसाब रखता है। यानी यह बताता है कि आपने ग्रिड से कितनी बिजली ली और सोलर से कितनी बिजली वापस ग्रिड में भेजी।
मीटर अपने आप नहीं बदलता
सिर्फ छत पर सोलर पैनल लगवा देने से मीटर अपने आप नहीं बदलता। इसके लिए संबंधित बिजली वितरण कंपनी यानी DISCOM के पास नेट मीटरिंग के लिए आवेदन करना होता है। आवेदन मंजूर होने के बाद सोलर सिस्टम की जांच की जाती है। इसमें सिस्टम की वायरिंग, अर्थिंग और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम देखे जा सकते हैं। तकनीकी जांच पूरी होने और मंजूरी मिलने के बाद नया मीटर लगाया और एक्टिव किया जाता है।
अतिरिक्त बिजली का क्या होता है?
मान लीजिए आपके घर ने एक महीने में ग्रिड से 300 यूनिट बिजली ली, लेकिन सोलर सिस्टम से 200 यूनिट अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज दी। नेट मीटर इस पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड रखता है। इसके आधार पर बिल में नियमों के मुताबिक समायोजन किया जा सकता है। यही वजह है कि ग्रिड से जुड़े सोलर सिस्टम में सही मीटरिंग बहुत जरूरी है। अगर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है लेकिन उसके लिए सही मीटर नहीं लगा है, तो उपभोक्ता को उसका उचित क्रेडिट मिलने में दिक्कत हो सकती है।
सब्सिडी के लिए भी जरूरी प्रक्रिया
रूफटॉप सोलर पर मिलने वाली सरकारी सहायता का लाभ लेने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सोलर लगाने के बाद संबंधित पोर्टल और DISCOM से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे करने पड़ सकते हैं। इसलिए सोलर पैनल लगवाने से पहले अपने क्षेत्र की बिजली कंपनी के नियम जरूर जांच लें। हर घर में केवल पैनल लगा देना ही पर्याप्त नहीं है। ग्रिड कनेक्शन, नेट मीटरिंग, तकनीकी जांच और जरूरी मंजूरी भी पूरी करनी होती है।
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