ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को किसानों का आंदोलन और तेज हो गया। किसान क्रांति पैदल यात्रा के तहत बड़ी संख्या में किसान भोपाल पहुंच चुके हैं और अब मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलनकारी किसानों की मुख्य मांग है कि सरकार मूंग की फसल की 100 फीसदी खरीदी सुनिश्चित करे और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार करते हुए टोकन सिस्टम को खत्म करे।
कृषि मंत्री से बातचीत बेनतीजा रही
मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धरना जारी रखेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
मूंग खरीदी और खाद वितरण सबसे बड़ी मांग
किसानों की कुल आठ मांगें हैं, लेकिन सरकार के साथ बातचीत में दो प्रमुख मुद्दों को सबसे अहम बताया गया है।
• मूंग की फसल की 100 फीसदी सरकारी खरीदी की जाए।
• खाद वितरण में टोकन सिस्टम समाप्त कर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए।
किसानों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें मूंग की खेती के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन अब खरीद से पीछे हट रही है। उनका कहना है कि इससे उन्हें 10 से 12 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का नुकसान हो रहा है।
'जेन-ज़ी किसान' संभाल रहे आंदोलन की कमान
आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि इस बार प्रदर्शन की अगुवाई युवा और जेन-ज़ी किसान कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह आंदोलन पारंपरिक किसान आंदोलनों से अलग है और युवा वर्ग बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
25 दिनों से जारी है आंदोलन
भोपाल पहुंचने से पहले किसान पिछले 25 दिनों से अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर धरना दे रहे थे। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। बताया जा रहा है कि आंदोलन में शामिल अधिकांश किसान नर्मदापुरम और आसपास के करीब 12 जिलों से आए हैं। ये क्षेत्र मुख्य रूप से नर्मदा नदी के आसपास स्थित कृषि प्रधान इलाके हैं।
सड़क पर ही बनाया दाल-बाटी का भोजन
होशंगाबाद रोड पर धरने के दौरान किसानों ने रात सड़क पर ही बिताई। उन्होंने वहीं आग जलाकर दाल-बाटी बनाई और टमाटर-मिर्च का भरता तैयार कर भोजन किया। किसानों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए राशन की व्यवस्था भी कर लेंगे।
भोपाल में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित
किसान आंदोलन के कारण भोपाल में कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए रूट डायवर्जन लागू किया है।
मुख्य वैकल्पिक मार्ग इस प्रकार हैं:
• नर्मदापुरम रोड से आने वाले वाहन 11 मील बाईपास, खजूरी कला और पिपलानी मार्ग का उपयोग करें।
• मिसरोद और भोपाल विश्वविद्यालय के बीच रहने वाले लोग बावड़ियांकला ब्रिज के रास्ते कोलार और 10 नंबर क्षेत्र जा सकते हैं।
• एमपी नगर से नर्मदापुरम रोड जाने वाले वाहन गोविंदपुरा, पिपलानी, पटेल नगर और खजूरी कला मार्ग का इस्तेमाल करें।
• एम्स जाने वाले लोग कटारा हिल्स, बागसेवनिया और आरएलएल ब्रिज के नीचे वाले मार्ग से आवागमन कर सकते हैं।
कई स्कूलों में अवकाश घोषित
किसान आंदोलन और संभावित ट्रैफिक जाम को देखते हुए भोपाल के कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। फिलहाल किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की नजर सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है
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