ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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बिहार सरकार ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला लिया है। सोमवार को राज्य सरकार ने घोषणा की कि हालिया छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे और हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाएगा। इस फैसले के साथ सरकार ने स्पष्ट किया कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक हुए प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना
बिहार गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था या हिरासत में लिया गया था, उन्हें बिना किसी देरी के रिहा किया जाए। साथ ही, प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह निर्णय छात्रों और युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
दिल्ली की घटना के बाद तेज हुआ था आंदोलन
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद बिहार में छात्र संगठनों ने लगातार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। आंदोलन धीरे-धीरे राज्यव्यापी अभियान में बदल गया और 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया। बंद के दौरान कई जिलों में प्रदर्शन हुए, जिससे सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
694 लोगों को लिया गया था हिरासत में
बिहार पुलिस के अनुसार, बिहार बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई थी। इस दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें लगभग आधे नाबालिग बताए गए। पुलिस का कहना था कि कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। इन घटनाओं में 91 पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी, दो प्रशासनिक अधिकारी तथा 13 आम नागरिक घायल हुए थे।
AK-47 फायरिंग विवाद ने बढ़ाई सियासत
बिहार बंद के दौरान सिवान जिले में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 राइफल से हवा में फायरिंग किए जाने का मामला भी चर्चा का विषय बना। पुलिस ने बताया कि जेपी चौक पर ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल अभिषेक कुमार को इस घटना के बाद निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों द्वारा घेर लिए जाने के बाद उन्होंने हवा में चार राउंड फायर किए थे। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की।
तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव लगातार छात्रों के समर्थन में आवाज उठाते रहे। उन्होंने मांग की थी कि आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने छात्रों को राहत नहीं दी, तो विपक्ष राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।
अब आगे क्या होगा?
सरकार के फैसले के बाद अब संबंधित जिलों की पुलिस और प्रशासन मुकदमे वापस लेने तथा हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी करेंगे। माना जा रहा है कि इस कदम से छात्र संगठनों और सरकार के बीच बढ़े तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उससे जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया संबंधित प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ सकती है, यदि वे इस आदेश के दायरे से बाहर हों।
NEET पेपर लीक आंदोलन के बाद बिहार सरकार का यह फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुकदमे वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने के निर्णय से हजारों छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, इस फैसले के बाद अब राज्य में छात्र आंदोलन की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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