ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
भारत की 2027 की जनगणना का अहम चरण आज से शुरू हो रहा है। इसकी शुरुआत देश के उन इलाकों से की जा रही है जहां भारी बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बाद में घर-घर पहुंचना मुश्किल हो सकता है। लद्दाख के साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में रहने वाले लोग पहले चरण में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इस प्रक्रिया को सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा जा रहा है। यानी लोग खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। इसके बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर इन जानकारियों को सत्यापित और दर्ज करेंगे।
17 से 31 अगस्त तक खुद भर सकेंगे जानकारी
इन विशेष इलाकों में रहने वाले लोग 17 अगस्त से 31 अगस्त के बीच अपनी जनगणना संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या की गणना अगले साल फरवरी में होने की योजना है। पहले बर्फीले इलाकों में प्रक्रिया शुरू करने का मुख्य कारण वहां का मौसम और भौगोलिक स्थिति है।
जनगणना में पूछे जाएंगे 40 सवाल
गृह मंत्रालय ने हाउसहोल्ड शेड्यूल के तहत पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची जारी की है। इसमें परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत जानकारी से लेकर शिक्षा, रोजगार, प्रवासन और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी शामिल है। जनगणना में नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्म तिथि, उम्र, वैवाहिक स्थिति, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म और जाति जैसी जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा माता-पिता की जानकारी, दिव्यांगता, मातृभाषा, अन्य भाषाओं का ज्ञान, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता से जुड़े सवाल भी होंगे।
पढ़ाई और रोजगार की भी ली जाएगी जानकारी
जनगणना में लोगों की शैक्षणिक योग्यता और वे किस संस्थान में पढ़ रहे हैं, इसकी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। साथ ही पिछले एक साल में काम किया है या नहीं, आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय, उद्योग या सेवा का प्रकार और काम की तलाश जैसी जानकारी भी मांगी जाएगी। लोगों से उनके कार्यस्थल तक आने-जाने के तरीके के बारे में भी सवाल किया जाएगा। इससे देश में रोजगार और लोगों की आवाजाही की तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है।
प्रवासन से जुड़े सवाल भी होंगे अहम
इस बार लोगों से जन्मस्थान, पिछला निवास स्थान, प्रवासन का कारण और किसी गांव या शहर में कितने समय से रह रहे हैं, जैसी जानकारी भी ली जाएगी।इसके अलावा स्थायी आवासीय पता, जीवित बच्चों की संख्या और पिछले एक साल में जीवित जन्म से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
मोबाइल, आधार और वोटर ID की जानकारी भी
जनगणना के 40 सवालों में बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर ID और भारतीय पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं, यह भी पूछा जाएगा। हालांकि इन सवालों को लेकर लोगों के मन में डेटा सुरक्षा और निजता से जुड़े सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए लोगों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि वे आधिकारिक जनगणना प्रक्रिया के तहत ही अपनी जानकारी दर्ज करें।
लद्दाख के लिए पहली स्वतंत्र जनगणना
इस जनगणना को लद्दाख के लिए खास माना जा रहा है। 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में आधिकारिक जनगणना डेटा मिलने की उम्मीद है। लद्दाख में लेह और कारगिल जिले शामिल हैं। यहां बर्फबारी और कठिन रास्तों के कारण सामान्य समय में जनगणना कर्मचारियों के लिए हर घर तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जम्मू-कश्मीर के भी 16 जिलों में भारी बर्फबारी होती है। इसलिए इन इलाकों में जनगणना पहले कराई जा रही है, ताकि खराब मौसम शुरू होने से पहले जरूरी आंकड़े जुटाए जा सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है Census 2027?
जनगणना सिर्फ आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है। इससे देश में जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, प्रवासन, सामाजिक संरचना और विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े मिलते हैं। 2027 की जनगणना में डिजिटल प्रक्रिया और सेल्फ-एन्यूमरेशन जैसे तरीकों का इस्तेमाल इसे पहले की जनगणना से अलग बनाता है। अब देखना होगा कि बर्फीले और दूरदराज इलाकों में यह नई प्रक्रिया कितनी सफल रहती है और इससे देश को किस तरह का नया जनसांख्यिकीय डेटा मिलता है।
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