ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों गंभीर जांच के घेरे में है। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके के बाद इस यूनिवर्सिटी का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। पुलिस और जांच एजेंसियों की अब तक की जांच में सामने आया है कि यह सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि एक बड़े ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा बन चुका था — जिसमें समाज के शिक्षित चेहरों, जैसे डॉक्टर और छात्र, का इस्तेमाल किया जा रहा था।
वेबसाइट हैक, धमकी भरा संदेश और बढ़ा शक
11 नवंबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट हैक कर ली गई। वेबसाइट खोलने पर एक विवादित और धमकी भरा संदेश सामने आया, जिसमें लिखा था — “भारत की धरती पर इस तरह की इस्लामिक यूनिवर्सिटी की कोई जगह नहीं है। अगर भारत में रहना है तो शांति से रहना होगा, नहीं तो इस्लामिक जिहाद करने वालों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए।”
संदेश में आगे चेतावनी दी गई कि "हम तुम्हारी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, इसे बंद करो नहीं तो बर्बाद कर देंगे।" कुछ ही देर बाद वेबसाइट को बहाल कर दिया गया, लेकिन तब तक यह मामला पुलिस और साइबर सेल के संज्ञान में आ चुका था।
डॉ. मुजम्मिल शकील के घर से मिला 2900 किलो विस्फोटक
घटनाक्रम यहीं खत्म नहीं हुआ। जांच के दौरान पुलिस को डॉ. मुजम्मिल शकील के दो किराए के घरों से 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद हुई। यह बरामदगी 9 नवंबर को हुई थी। मुजम्मिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था और फतेहपुर तगा तथा धौज गांव में किराए के मकानों में रहता था।
धौज गांव स्थित उसके घर से CID की टीम को कुछ उर्दू में लिखे शब्द और नोट्स भी मिले, जिनका वीडियो रिकॉर्ड बनाकर जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को शक है कि इन शब्दों में किसी साजिश से जुड़े कोड या संकेत छिपे हो सकते हैं।
लाल किला ब्लास्ट से जुड़ा निकला कनेक्शन
दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भयंकर धमाके में 10 लोगों की मौत और 24 घायल हुए थे। जांच में सामने आया कि जिस i20 कार में ब्लास्ट हुआ, वह डॉ. मुजम्मिल के साथी डॉ. मोहम्मद उमर नबी की थी। उमर भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में ही पढ़ाता था। वह 7 मई 2024 को यूनिवर्सिटी से जुड़ा था लेकिन 30 अक्टूबर के बाद से उसने कॉलेज आना बंद कर दिया था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ब्लास्ट वाले दिन उमर उसी यूनिवर्सिटी से i20 कार लेकर निकला था, और बाद में वही कार धमाके में उड़ गई। जांच के लिए अब कार में मिले शव के टुकड़ों की DNA जांच की जा रही है, ताकि यह पुख्ता हो सके कि उमर ही उस कार में था।
13 लोग हिरासत में — 7 डॉक्टर, 5 छात्र और एक युवती
पुलिस ने मंगलवार को अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छापेमारी की। छापे के दौरान 13 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 7 डॉक्टर, 5 छात्र और एक युवती शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वह युवती डॉ. मुजम्मिल की कार इस्तेमाल करती थी।
साथ ही, फतेहपुर तगा गांव में भी पुलिस ने छापेमारी की और 4 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें एक जम्मू-कश्मीर, एक तमिलनाडु, एक ओडिशा और एक हरियाणा के हथीन (पलवल) जिले का निवासी है। पुलिस को इनके मोबाइल फोनों में वॉट्सऐप चैट डिलीट मिली है, जिससे शक और गहरा गया है।
फतेहपुर तगा गांव में कोई नहीं जानता मुजम्मिल को
जांच एजेंसियों के पहुंचने के बाद मीडिया टीमों ने भी इलाके का दौरा किया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मुजम्मिल को कभी गांव में देखा ही नहीं। उसका किराए का घर गांव के बिलकुल आखिरी छोर पर था, जहां आसपास कोई नहीं रहता था। यह जगह एकदम सुनसान थी, जिससे शक होता है कि वहां विस्फोटक सामग्री गुपचुप तरीके से रखी जा रही थी।
गिरफ्तार डॉक्टरों के नाम और मॉड्यूल का खुलासा
अब तक की जांच में पुलिस ने तीन डॉक्टरों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया है —
- डॉ. आदिल अहमद राठर
- डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई उर्फ मुजम्मिल शकील
- डॉ. शाहीन शाहिद (लेडी डॉक्टर)
ये तीनों डॉक्टर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं और पुलिस के अनुसार, इनकी भूमिका आतंकी साजिश में अहम थी। सूत्रों ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क एक “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” का हिस्सा है, जिसमें उच्च शिक्षित लोग शामिल थे ताकि उन पर आसानी से किसी को शक न हो।
गल्फ फंडिंग और आतंकी फाइनेंसिंग पर भी जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि यूनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन में गल्फ देशों से फंडिंग के संकेत मिले हैं। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इंटेलिजेंस एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पैसों का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया। हालांकि, अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
डॉक्टरों से लेकर शिक्षित युवाओं तक फैला नेटवर्क
यह पूरा मामला देश के लिए एक चेतावनी है कि आतंक का चेहरा अब सिर्फ सीमा पार से नहीं, बल्कि शिक्षित तबके में भी घुसपैठ कर चुका है। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम अब एक “बौद्धिक आतंक नेटवर्क” के केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है — जहाँ डॉक्टर, छात्र और शिक्षित लोग कट्टरपंथी संगठनों के हाथों में मोहरा बन रहे थे।
जांच जारी है, और पुलिस सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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