ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के झंडुता इलाके में भूस्खलन की चपेट में आने से एक बस दुर्घटना में 18 यात्रियों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब यात्रियों से भरी बस भल्लू पुल के पास अचानक मलबे की चपेट में आ गई। बस में लगभग 30 लोग सवार थे और यह संतोषी मरोतन से घुमारवीं जा रही थी।
प्रशासनिक लापरवाही और राहत में देरी
ग्रामीणों ने हादसे के तुरंत बाद प्रशासन को सूचना दी, लेकिन राहत और बचाव दल की प्रतिक्रिया में देरी हुई। जेसीबी बुलाने में भी समय लगा, जिससे मलबा हटाने में देरी हुई और कई यात्रियों की दम घुटने से मौत हो गई। स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से कुछ घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
जान-माल की हानि पर नेताओं ने जताया शोक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह समाचार अत्यंत दुखद है और उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए PMNRF से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा मानसिक रूप से झकझोरने वाला है और उन्होंने प्रभावित परिवारों को संबल देने की बात कही।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और प्रभावित परिवारों से मिलने का आश्वासन दिया। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।
हादसे का निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश का यह हादसा न केवल प्राकृतिक आपदा का उदाहरण है, बल्कि प्रशासनिक तैयारी और तेजी से राहत कार्य के महत्व को भी उजागर करता है। समय पर बचाव दल और उपकरण न होने के कारण इस दुर्घटना में जानों का नुकसान बढ़ गया। यह हादसा दर्शाता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क सुरक्षा को लेकर सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई कितनी आवश्यक है।
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