ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारतीय वायुसेना के सामने इस समय एक बड़ी चुनौती fighter aircraft की संख्या बनाए रखने की है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने साफ कहा है कि मौजूदा स्थिति को संभालने के लिए हर साल करीब 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है। उनके मुताबिक, यह संख्या हर साल करीब दो fighter squadrons जोड़ने के बराबर है। अभी वायुसेना के पास 29 operational fighter squadrons हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42.5 है।
पुराने विमान धीरे-धीरे हो रहे हैं बाहर
वायुसेना में इस्तेमाल हो रहे कई पुराने fighter aircraft आने वाले समय में service से बाहर होंगे। ऐसे में अगर नए विमानों की delivery उसी रफ्तार से नहीं हुई, तो कुल squadron strength और कम हो सकती है। यही वजह है कि वायुसेना लगातार नए aircraft की जरूरत पर जोर दे रही है।
Tejas से बड़ी उम्मीद
भारत का indigenous fighter jet Tejas इस कमी को पूरा करने की योजना का एक अहम हिस्सा है। Tejas Mk-1A के बड़े order के बावजूद delivery में देरी चिंता का कारण बनी हुई है। इसके अलावा Tejas Mk-2 पर भी काम चल रहा है। यह aircraft आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
MRFA और AMCA पर भी नजर
वायुसेना ने 114 Multi-Role Fighter Aircraft यानी MRFA की संभावित खरीद और Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA को भी अपनी भविष्य की योजनाओं में शामिल किया है। AMCA भारत का fifth-generation fighter project है। इसका मकसद देश को advanced combat aircraft के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। एपी सिंह ने यह भी कहा कि अगर कुछ बड़े indigenous projects में देरी होती है, तो दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। रूस की Su-57 पेशकश को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
समय पर delivery सबसे अहम
वायुसेना प्रमुख का जोर सिर्फ aircraft खरीदने पर नहीं, बल्कि समय पर delivery पर भी है। उनका कहना है कि defence technology में देरी का सीधा असर operational capability पर पड़ता है। एक fighter aircraft को तैयार करने में सिर्फ विमान बनाना ही शामिल नहीं होता। उसके साथ training, maintenance, spare parts और infrastructure भी जरूरी होते हैं। इसलिए आने वाले वर्षों में भारत के लिए चुनौती यह होगी कि नए aircraft programs को समय पर आगे बढ़ाया जाए और मौजूदा fighter squadrons की कमी को जल्द से जल्द रोका जाए।
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