ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड से जुड़े ‘सूर्या वॉरियर’ पैराट्रूपर्स ने एक खास टैंडेम पैराशूट जंप किया। इस अभ्यास में कॉम्बैट डॉग को भी शामिल किया गया। यह सामान्य पैराशूट जंप से अलग था क्योंकि जवान के साथ प्रशिक्षित सैन्य कुत्ते को भी सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचाया गया।
कॉम्बैट डॉग की भूमिका
भारतीय सेना में प्रशिक्षित कुत्तों का इस्तेमाल कई तरह के ऑपरेशनल कामों में किया जाता है। इनकी मदद विस्फोटक तलाशने, संदिग्ध चीजों की पहचान करने और सुरक्षा अभियानों में ली जाती है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर कॉम्बैट डॉग को जवानों के साथ किसी ऑपरेशन वाले इलाके में पहुंचाना भी जरूरी हो सकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस तरह की ट्रेनिंग की जाती है।
टैंडेम जंप क्यों है खास?
टैंडेम पैराशूट जंप में एक प्रशिक्षित पैराट्रूपर दूसरे व्यक्ति या विशेष उपकरण के साथ पैराशूट से नीचे आता है। इस तरह के जंप में संतुलन, ऊंचाई और लैंडिंग पर खास ध्यान देना पड़ता है। कॉम्बैट डॉग के साथ जंप में यह चुनौती और बढ़ जाती है क्योंकि जानवर की सुरक्षा और उसकी स्थिति को भी लगातार संभालना पड़ता है।
सेना की तैयारी का हिस्सा
इस तरह के अभ्यास सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का हिस्सा होते हैं। किसी भी चुनौतीपूर्ण इलाके में जवानों को तेजी से पहुंचाने के लिए पैराशूट तकनीक महत्वपूर्ण होती है। अगर किसी मिशन में प्रशिक्षित डॉग की जरूरत हो तो उसे भी जवानों के साथ सुरक्षित तरीके से पहुंचाना जरूरी होता है। यही वजह है कि इस तरह के अभ्यास भविष्य की संभावित परिस्थितियों के लिए तैयारी बढ़ाते हैं।
पहली बार का खास अनुभव
रिपोर्ट में इस अभ्यास को कॉम्बैट डॉग के साथ किया गया खास टैंडेम जंप बताया गया है। इसमें जवान, डॉग हैंडलर और कॉम्बैट डॉग ने मिलकर अभ्यास किया। इस तरह की ट्रेनिंग सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं बल्कि वास्तविक ऑपरेशन में आने वाली जरूरतों को ध्यान में रखकर की जाती है। सेना के लिए ऐसे अभ्यास जवानों और सैन्य कुत्तों के बीच तालमेल को भी बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
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