ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च जारी है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच छात्र नेता देवेंद्र महतो ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महतो का दावा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों के गठबंधन की सरकार छात्रों की मांगों को लेकर उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे देवेंद्र महतो
नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो ने प्रशासन को चकमा देकर एंबुलेंस के जरिए विधानसभा मार्च में पहुंचने की कोशिश की। उनके साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी थी। एबीपी न्यूज़ से बातचीत में महतो ने कहा कि उनका स्वास्थ्य काफी कमजोर हो चुका है, लेकिन विधानसभा के आसपास लगाए गए कंटीले तार देखकर उनके अंदर गुस्सा पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।
‘कंटीले तार देखकर मेरी आत्मा रो उठी’
देवेंद्र महतो ने कहा कि अगर सरकार छात्रों की मांगों का समर्थन करती तो उन्हें भूख हड़ताल से उठकर आंदोलन में शामिल होने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कंटीले तार देखकर उनकी आत्मा रो उठी। महतो ने यह भी कहा कि अगर आंदोलन के दौरान उनकी जान भी चली जाती है, तब भी वह छात्रों की मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने युवाओं की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि युवा शक्ति को रोकना आसान नहीं है।
CBI जांच और CGL रद्द करने की मांग
छात्र नेता की सबसे बड़ी मांग परीक्षा में कथित धांधली की CBI जांच और CGL परीक्षा को रद्द करना है। महतो ने साफ कहा कि सरकार अगर छात्रों की बाकी मांगों को पूरा करने का दावा कर रही है, तो इन दो मुद्दों पर भी फैसला लेना होगा। सरकार की ओर से 98 फीसदी मांगें माने जाने के दावे पर उन्होंने कहा कि असली सवाल बाकी दो फीसदी का है। उनके मुताबिक, यही दो फीसदी मांग—CBI जांच और CGL परीक्षा रद्द करना—सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।
‘BJP आए तो स्वागत, JMM-कांग्रेस भी साथ आए’
आंदोलन को बीजेपी का समर्थन मिलने के सवाल पर देवेंद्र महतो ने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होने वाला हर व्यक्ति स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी छात्रों के साथ खड़ी होती है तो उनका स्वागत है। साथ ही उन्होंने JMM और कांग्रेस से भी आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। महतो ने कहा कि अगर सरकार छात्रों की मांगें मान लेती है तो वह इसका राजनीतिक क्रेडिट भी ले सकती है।
2029 के चुनाव को लेकर भी दिया संकेत
शिबू सोरेन की तस्वीर अपने साथ रखने के सवाल पर देवेंद्र महतो ने कहा कि अगर सरकार छात्रों को संतुष्ट नहीं करती है तो इसका असर आने वाले समय में दिखाई देगा। उन्होंने 2029 की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई अचानक होने वाला बदलाव नहीं होगा, बल्कि सिस्टम से संघर्ष करते हुए बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कंटीले तारों के बीच बढ़ता आंदोलन
रांची में विधानसभा मार्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। विधानसभा के आसपास बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए गए हैं। वहीं, छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल और विधानसभा मार्च में उनकी मौजूदगी ने आंदोलन को और चर्चा में ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की CBI जांच और CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है और आंदोलन के आगे की दिशा सरकार के अगले कदम पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
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