ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक बहस अभी खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के बाद अब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, ओवैसी ने सीधे बयान पर टिप्पणी करने के बजाय मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुए एक वायरल वीडियो को लेकर तंज कसा।
महाकाल मंदिर का वीडियो हुआ वायरल
दरअसल, उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में बने एक फुट ओवरब्रिज का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बड़ी संख्या में सिक्योरिटी गार्ड पुल पर एक साथ दिखाई दे रहे हैं और उछलते हुए नजर आते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब 91 फीट लंबे फुट ओवरब्रिज का लोड टेस्ट था। पुल की मजबूती और क्षमता जांचने के लिए करीब 300 सिक्योरिटी गार्ड को एक साथ पुल पर खड़ा किया गया और कुछ समय तक उछलने के लिए कहा गया। यह टेस्ट करीब 10 मिनट तक चला।
आखिर ऐसा टेस्ट क्यों किया गया?
दरअसल, 17 अगस्त को सावन की सोमवारी के साथ नागपंचमी भी थी। ऐसे में महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना थी।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए फुट ओवरब्रिज की क्षमता और सुरक्षा की जांच करना जरूरी था। इसी के लिए यह लोड टेस्ट किया गया। यानी गार्डों का पुल पर कूदना कोई अचानक हुआ मामला नहीं था, बल्कि पुल की मजबूती जांचने के लिए किया गया एक टेस्ट बताया गया।
ओवैसी ने क्यों कहा ‘दिमागी’?
वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर एक सवाल उठाया गया कि अगर टेस्ट के दौरान पुल को कुछ हो जाता और वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड घायल हो जाते, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा— “ये तो गजब के... दिमागी हैं।” ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। इसलिए उनके ‘दिमागी’ शब्द को पीएम मोदी के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, ओवैसी ने अपने पोस्ट में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया।
क्या लोड टेस्ट पर सवाल उठाना सही है?
यहां एक बात समझना जरूरी है। किसी पुल का load test करना सामान्य engineering process का हिस्सा हो सकता है। इसका मकसद यह देखना होता है कि पुल तय भार को सुरक्षित तरीके से संभाल सकता है या नहीं। लेकिन इस मामले में सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि लोगों को पुल पर उछलने के लिए इस्तेमाल करना कितना सुरक्षित तरीका था। अगर किसी टेस्ट में इंसानों का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो उनकी safety सबसे अहम हो जाती है। इसलिए इस वीडियो को देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस test के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे और इसे engineers की निगरानी में किस तरह कराया गया।
‘दिमागी नक्सल’ पर बढ़ी राजनीतिक बहस
15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र किया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने इस बयान पर सवाल उठाए। पी. चिदंबरम और अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। अब ओवैसी ने भी वायरल वीडियो के जरिए ‘दिमागी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा है। इस पूरे मामले में एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी है, तो दूसरी तरफ महाकाल मंदिर के फुट ओवरब्रिज की safety को लेकर सवाल हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस load test को लेकर क्या सफाई देता है और क्या इसे engineering standards के मुताबिक किया गया था।
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