BRICS समिट से पहले PM मोदी का खास संदेश, संस्कृत श्लोक के जरिए दिया विश्व कल्याण का मंत्र
BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर संस्कृत श्लोक के जरिए दुनिया को एकता, शांति और कल्याण का संदेश दिया। दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक में कई देशों के बड़े नेता शामिल होंगे। ऐसे में PM मोदी का यह संदेश भारत की कूटनीतिक सोच और वैश्विक सहयोग के नजरिए को भी सामने रखता है।
BRICS समिट से पहले PM मोदी का खास संदेश, संस्कृत श्लोक के जरिए दिया विश्व कल्याण का मंत्र
  • Category: भारत

दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और दुनिया की नजर इस बड़े आयोजन पर टिकी हुई है। अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा संदेश साझा किया, जिसने भारत की पारंपरिक सोच और दुनिया के प्रति उसके नजरिए को एक साथ सामने रखा। BRICS समिट से पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर संस्कृत का एक श्लोक साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने पूरे विश्व के कल्याण, शांति और आपसी सहयोग की भावना पर जोर दिया। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया कई तरह के तनाव और चुनौतियों से गुजर रही है।


संस्कृत श्लोक के जरिए दिया संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में संस्कृत श्लोक के जरिए विश्व कल्याण की भावना को सामने रखा। भारत की परंपरा में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसी सोच का खास महत्व रहा है। इसका सीधा मतलब है कि सभी लोग सुखी और स्वस्थ रहें तथा किसी को दुख का सामना न करना पड़े। BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का संदेश भारत की उस सोच को दिखाता है, जिसमें विकास के साथ-साथ शांति और मानव कल्याण को भी महत्व दिया जाता है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि BRICS सम्मेलन में शामिल होने वाले नेताओं के बीच सकारात्मक और उपयोगी बातचीत होगी। उनका संदेश सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें पूरी दुनिया के लिए बेहतर भविष्य की बात दिखाई दी।


दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस बैठक में संगठन के सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी भी इस बैठक को खास बना रही है। इसके अलावा दूसरे सदस्य और पार्टनर देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। एक ही मंच पर इतने बड़े देशों के नेताओं की मौजूदगी के कारण इस बैठक को वैश्विक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


भारत के लिए क्यों खास है यह सम्मेलन?

BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए एक बड़ा मौका है। इस मंच के जरिए भारत विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों को दुनिया के सामने रखने की कोशिश कर रहा है। भारत लंबे समय से यह बात कहता रहा है कि वैश्विक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को ज्यादा जगह मिलनी चाहिए। BRICS इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इस बार भारत की कोशिश सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित रहने की नहीं है। बैठक में तकनीक, व्यापार, सुरक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु और आपसी सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।


बदलती दुनिया में सहयोग पर जोर

आज दुनिया के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में तनाव, युद्ध, व्यापार को लेकर विवाद और आर्थिक अनिश्चितता जैसे मुद्दे देशों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। ऐसे माहौल में BRICS जैसे मंच की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। सदस्य देश एक-दूसरे के साथ आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का संस्कृत श्लोक वाला संदेश भी इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा सकता है। भारत यह संदेश देना चाहता है कि विकास और ताकत के साथ दुनिया के कल्याण की भावना भी जरूरी है।


BRICS सिर्फ पांच देशों तक सीमित नहीं

BRICS की शुरुआत पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—से हुई थी। बाद में इसमें कई नए देश जुड़े। इसके विस्तार ने संगठन को पहले से ज्यादा बड़ा और प्रभावशाली बना दिया है। अब BRICS में शामिल देशों की अर्थव्यवस्था और आबादी का वैश्विक स्तर पर बड़ा हिस्सा है। यही वजह है कि इस संगठन के फैसलों और चर्चाओं पर दुनिया के दूसरे देशों की भी नजर रहती है। भारत की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में नए सहयोग और साझेदारी के रास्तों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।


PM मोदी की कूटनीति में भारतीय सोच

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की पारंपरिक सोच और आधुनिक कूटनीति को साथ लेकर चलते हैं। योग, आयुर्वेद, वसुधैव कुटुंबकम और विश्व कल्याण जैसे विचारों को भारत की विदेश नीति के संदेशों में जगह मिलती रही है। BRICS से पहले संस्कृत श्लोक साझा करना भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा सकता है। इसका संदेश यह है कि भारत दुनिया के साथ सहयोग को सिर्फ आर्थिक फायदे के नजरिए से नहीं देखता, बल्कि इसमें मानव कल्याण और शांति को भी जरूरी मानता है।


बड़े मुद्दों पर होगी बातचीत

BRICS सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई मुद्दे भी चर्चा में रह सकते हैं। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था जैसे विषयों पर सदस्य देशों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्ष और बदलते वैश्विक समीकरण भी नेताओं की चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। भारत के लिए यह मौका अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने के साथ दूसरे देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का भी है।


दुनिया की नजर भारत पर

दिल्ली में हो रही BRICS बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दिलचस्पी है। खासकर भारत, रूस और चीन जैसे बड़े देशों के नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी इसे और अहम बना रही है। ऐसे समय में PM मोदी का विश्व कल्याण और सहयोग पर आधारित संदेश भारत की प्राथमिकताओं का संकेत देता है। भारत एक तरफ अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और सहयोग की बात भी कर रहा है।


BRICS सम्मेलन के दौरान होने वाली बैठकों और फैसलों से आने वाले समय में संगठन की दिशा को लेकर कई संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री का संस्कृत श्लोक वाला संदेश यह बताता है कि भारत इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को सिर्फ एक बैठक के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया के सामने अपनी सोच और प्राथमिकताओं को रखने के अवसर के रूप में भी देख रहा है।

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