ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
हर महीने बिजली का बिल आते ही घर के बजट का हिसाब बदल जाता है। गर्मियों में तो पंखे, कूलर और AC की वजह से बिजली की खपत और बढ़ जाती है। ऐसे में बहुत से लोग अब अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के बारे में सोच रहे हैं। सोलर पैनल लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि घर में इस्तेमाल होने वाली बिजली का एक हिस्सा खुद पैदा किया जा सकता है। इससे ग्रिड से ली जाने वाली बिजली कम होती है और लंबे समय में बिजली के बिल में बड़ी बचत हो सकती है। सरकार भी रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दे रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को अपने घर पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है।
कितनी मिलती है सरकारी सब्सिडी?
सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 1 किलोवाट सिस्टम पर 30 हजार रुपये प्रति किलोवाट की केंद्रीय सहायता मिलती है। 2 किलोवाट तक यह राशि 60 हजार रुपये हो जाती है। अगर कोई उपभोक्ता 3 किलोवाट या उससे ज्यादा क्षमता का सिस्टम लगाता है, तो केंद्रीय सब्सिडी अधिकतम 78 हजार रुपये तक सीमित रहती है।
यानी सिर्फ केंद्र की योजना के तहत 3 किलोवाट सिस्टम पर 78 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है। यहीं पर उत्तर प्रदेश में मिलने वाली अतिरिक्त राज्य सहायता की वजह से कुल लाभ 1 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 3 किलोवाट सिस्टम पर केंद्र और राज्य की सहायता मिलाकर करीब 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी बताई जा रही है।
क्या सच में बिजली का बिल जीरो हो जाएगा?
यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में आता है। सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली का बिल कम जरूर हो सकता है, लेकिन हर घर में बिल पूरी तरह जीरो होगा, ऐसा कहना सही नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि घर में कितनी बिजली इस्तेमाल होती है, कितनी बिजली सोलर सिस्टम बनाता है और सिस्टम की क्षमता कितनी है।
अगर सोलर सिस्टम दिन के समय अच्छी मात्रा में बिजली बनाता है और घर की खपत उसके आसपास रहती है, तो ग्रिड से बिजली लेने की जरूरत काफी कम हो सकती है। नेट मीटरिंग की सुविधा होने पर जरूरत से ज्यादा बनी बिजली ग्रिड में जा सकती है और नियमों के अनुसार उसका हिसाब बिजली के बिल में किया जाता है।
3 किलोवाट सिस्टम किसके लिए उपयोगी हो सकता है?
घर में कितनी बिजली खर्च होती है, इसके हिसाब से सोलर सिस्टम की क्षमता तय करनी चाहिए। छोटे परिवार या कम बिजली इस्तेमाल करने वाले घर के लिए 1 या 2 किलोवाट का सिस्टम पर्याप्त हो सकता है। वहीं जिन घरों में ज्यादा बिजली खर्च होती है, वहां 3 किलोवाट या उससे बड़ा सिस्टम लगाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सिर्फ सब्सिडी देखकर सिस्टम लगवाना सही तरीका नहीं है। पहले यह देखना जरूरी है कि घर की औसत बिजली खपत कितनी है और छत पर पर्याप्त धूप आती है या नहीं।
सोलर लगवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सोलर पैनल लगाने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच कर लेना चाहिए। सबसे पहले छत पर पर्याप्त जगह होनी चाहिए। वहां दिन के ज्यादातर समय धूप आती हो, यह भी जरूरी है। इसके अलावा पैनल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और दूसरे उपकरणों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। सिर्फ कम कीमत देखकर किसी भी कंपनी या इंस्टॉलर से सिस्टम लगवाना बाद में महंगा पड़ सकता है। सब्सिडी के लिए भी अधिकृत प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। सरकारी योजना से जुड़ी जानकारी और आवेदन के लिए आधिकारिक रूफटॉप सोलर पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सोलर सिर्फ बचत नहीं, लंबे समय का निवेश भी है
सोलर पैनल लगाने का फायदा सिर्फ एक-दो महीने के बिजली बिल में दिखाई नहीं देता। इसका असली फायदा लंबे समय में सामने आता है। एक बार सिस्टम लग जाने के बाद घर अपनी जरूरत की कुछ बिजली खुद बनाता है। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटती है और बिजली की कीमतों में बदलाव का असर भी कुछ हद तक कम हो सकता है। साथ ही सोलर ऊर्जा पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प मानी जाती है, क्योंकि इससे बिजली बनाने के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
योजना का फायदा लेने से पहले सही जानकारी जरूरी
सोलर पैनल को लेकर सोशल मीडिया और अलग-अलग वेबसाइटों पर कई तरह के दावे देखने को मिलते हैं। कहीं “बिजली बिल पूरी तरह खत्म” होने की बात कही जाती है तो कहीं “एक लाख रुपये तक मुफ्त” जैसे दावे किए जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उपभोक्ता अपने राज्य की सब्सिडी, सिस्टम की क्षमता, कुल लागत और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक पोर्टल से ही जांचे। सही सिस्टम और सही प्रक्रिया के साथ रूफटॉप सोलर घर के बिजली खर्च को काफी कम कर सकता है। यही वजह है कि आने वाले समय में घरों की छत पर सोलर पैनल सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि बिजली बचाने का एक महत्वपूर्ण तरीका बन सकते हैं।
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